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Monday, January 14, 2013

राशियों के मेल से तय होता कुंभ

इलाहाबाद : आस्था और विश्वास के प्रतीक कुंभ का स्थान राशियों के अनुकूल योग पर तय किया जाता है. ऐसी मान्यता है कि कुछ विशेष राशियों के संयोग से ही कुंभ के आयोजन स्थल को तय किया जाता है जहां साधु-संतों के साथ श्रद्धालुओं का जमघट लगता है. कुंभ में स्नान का विशेष महत्व है. आइए जानते हैं कि किन राशियों के मेल से कुंभ में आस्था की डुबकी का संयोजन बनता है.
ये है राशियों का मेल
- मकर राशि में सूर्य और वृष राशि में बृहस्पति पर भी प्रयाग का कुंभ होता है.
-कुंभ राशि में बृहस्पति और मेष राशि में सूर्य के प्रवेश पर हरिद्वार में कुंभ पर्व होता है.
- सिंह राशि में बृहस्पति के प्रवेश या फिर अमावस्या के दिन बृहस्पति सूर्य और चंद्रमा के कर्क राशि में प्रवेश पर नासिक में कुंभ होता है.
- मेष राशि में बृहस्पति और मकर राशि में सूर्य−चंद्रमा के प्रवेश पर प्रयाग का कुंभ होता है.
- सिंह राशि में बृहस्पति और मेष राशि में सूर्य के प्रवेश पर उज्जैन का कुंभ होता है.
पुराणों में भी है कुंभ उल्लेख 
कुंभ मेले की छटा और इसके महत्व का गुणगान वेदों से लेकर पुराणिक कथाओं में भी किया गया है. शिव पुराण, वाराह पुराण, नारदीय पुराण और ब्रह्म पुराण. इसके अलावा अर्थवेद में भी कुंभ का नाम आता है.
कुंभ मेले में डुबकी लगाने की अहम तिथियां
14 जनवरी − मकर संक्रांति (संपन्न)
27 जनवरी − पौष पूर्णिमा
10 फरवरी− मौनी अमावस्या
15 फरवरी− वसंत पंचमी
25 फरवरी− माघ पूर्णिमा
10 मार्च − महाशिवरात्रि  
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