नई दिल्ली। अकबरी मस्जिद को लेकर दिल्ली सरकार
ने अभी राहत की सांस भी नहीं ली थी कि राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (एनसीएम)
ने उसके सामने एक नई मुश्किल खड़ी कर दी है।
आयोग
ने केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय से दिल्ली की 31 मस्जिदों को इबादत के लिए
खोलने की सिफारिश की है। ये सभी मस्जिदें ऐतिहासिक धरोहर हैं और प्राचीन
स्मारक और पुरातात्विक स्थल अधिनियम 1958 के तहत संरक्षित हैं।
आयोग
के इस सुझाव को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग पहले ही यह कह कर ठुकरा
चुका है कि मौजूदा कानून के तहत इन मस्जिदों को इबादत के लिए आम जनता के
लिए खोलना संभव नहीं है।
ऐसी
मस्जिदों को खोलने से फिर अन्य धमोर्ं के संरक्षित स्मारकों को भी खोलना
पड़ेगा। मजे की बात यह है कि खुद आयोग ने अपनी एक बैठक में इस योजना के
खिलाफ इच्छा जताई थी।
मगर
अब आयोग के मुखिया वजाहत हबीबुल्लाह ने संस्कृति मंत्रालय को पत्र लिखकर
निवेदन किया है कि ऐसी बहुत सी मस्जिदें, जो संरक्षित श्रेणी में हैं मगर
देखरेख के अभाव के कारण निराशाजनक स्थिति में हैं, इनका सही तरीके से
इस्तेमाल नहीं हो रहा है।
हबीबुल्लाह
का इशारा जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना अरशद मदानी के एक पत्र की
ओर था जिसमें मौलाना ने कहा है कि इन मस्जिदों में पर्यटक और युवा जोड़ों
का आना-जाना होता है।
वे
यहां ऐसी बहुत सी गतिविधियों को अंजाम देते हैं जो हर मजहब के धार्मिक
स्थानों पर प्रतिबंधित हैं। इन गतिविधियों से मुस्लिम संप्रदाय के धार्मिक
भावनाओं को ठेस पहुंचती है।
ऐसी
गतिविधियों को रोकने के लिए जरूरी है कि मस्जिदों का इस्तेमाल उस काम के
लिए किया जाए जिसके लिए वे बनी हैं। हबीबुल्लाह इस मामले में संस्कृति
मंत्री कुमारी सैलजा से भी मिल चुके हैं, मगर सरकार ने इस मामले में चुप्पी
साध रखी है।
इस बीच आयोग
के एक दूसरे सदस्य डॉ. एचटी सांग्लियाना ने कुमारी सैलजा को भारतीय
पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग का विकेंद्रीकरण करने और उसकी दो शाखाएं बनाने की
सलाह दी है। उनका कहना है कि एक शाखा धार्मिक स्मारकों के लिए और दूसरी
धर्मनिरपेक्ष स्मारकों के लिए काम करेगी।
इन मस्जिदों को खोलने की है मांग
मस्जिद
भूल भुलैया (महरौली), मोहम्मदी मस्जिद (खेलगांव), मस्जिद खिड़की गांव
(हौजरानी), माजी मस्जिद (महरौली), मस्जिद वजीराबाद, मस्जिद शेख मखदूम
सब्जवारी (हौज खास), मस्जिद मुबारक शाह (कोटला मुबारकपुर), मस्जिद जमाली
कमाली (महरौली), मस्जिद मोथ (साउथ एक्सटेंशन), मस्जिद बड़ा गुंबद (लोधी
गार्डन), मस्जिद शेख युसूफ कातल (खिड़की एक्स), मस्जिद शेरशाह सूरी (पुराना
किला), मस्जिद इसा खान (बस्ती हजरत निजामुद्दीन), मस्जिद
अरब सराय (बस्ती हजरत निजामुद्दीन), मस्जिद बारहदरी (शेख सराय), मस्जिद
बेगमपुर (मालवीय नगर), मस्जिद रजिया सुल्ताना (महरौली), मस्जिद शाहपुर जाट
गांव, मस्जिद खैरुल मंजिल (चिड़ियाघर के पास), मस्जिद सुल्तान गौरी (वसंत
कुंज), मोती मस्जिद (लाल किला), मस्जिद सफदरजंग मदरसा (मंसूर का मदरसा), मोती
मस्जिद जफर महल, मस्जिद फिरोजशाही (हौज खास), मस्जिद बाग-ए-आलम (हौज खास
गांव), कांति मस्जिद (ग्रीन पार्क), मस्जिद अंदरून फैसल बिल मुकाबिल (ग्रीन
पार्क), मस्जिद गुलमोहर पार्क, चौबर्जी कमला नेहरू पार्क (दिल्ली
विश्वविद्यालय), मस्जिद अकब (वसंत विहार) और कांति मस्जिद (आरके पुरम)।
sabhar dainik bhakar.com se विनीता पाण्डेय
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