नई दिल्ली. संसद में शुक्रवार को सीएजी की तीन रिपोर्ट रखे जाने
के साथ ही सियासी पारा तेज हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कोयले
खदानों की नीलामी में सही प्रक्रिया नहीं अपनाए जाने से सरकारी खजाने को
1.86 लाख करोड़ रुपये का घाटा हुआ है। वहीं कैग की ही एक रिपोर्ट में अनिल
अंबानी की कंपनी को 29,033 करोड़ रुपये का फायदा पहुंचाए जाने की बात कही
गई है। बीजेपी सहित विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (जो उस दौरान
कोयला मंत्रालय भी देखा करते थे) समेत यूपीए सरकार पर हमला बोल दिया है।
लेकिन सरकार ने रिपोर्ट को
हल्के में लिया है। प्रधानमंत्री कार्यालय में मंत्री वी. नारायणसामी ने
कहा है कि यह शुरुआती रिपोर्ट है और इसे पेश करने में भी सीएजी ने
संवैधानिक प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया है।
राजीव शुक्ला ने भी सीएजी की रिपोर्ट को हल्के में उड़ा दिया है उन्होंने कहा कि सीएजी तो किसी भी सरकार के खिलाफ ही रिपोर्ट देती है। यह रिपोर्ट लोक लेखा समिति (पीएसी) में विचार के लिए जाएगी, फिर देखा जाएगा। राजीव शुक्ला ने कहा, 'कौआ कान लेकर उड़ा, कौआ कान लेकर उड़ा का शोर हुआ और सभी कौआ देखने लगे। इधर सीएजी रिपोर्ट आई नहीं कि उधर घोटाला-घोटाला चिल्लाने लगे। यदि सीएजी ही सब कुछ है तो फिर पीएसी का क्या मतलब है?'
राजीव शुक्ला ने भी सीएजी की रिपोर्ट को हल्के में उड़ा दिया है उन्होंने कहा कि सीएजी तो किसी भी सरकार के खिलाफ ही रिपोर्ट देती है। यह रिपोर्ट लोक लेखा समिति (पीएसी) में विचार के लिए जाएगी, फिर देखा जाएगा। राजीव शुक्ला ने कहा, 'कौआ कान लेकर उड़ा, कौआ कान लेकर उड़ा का शोर हुआ और सभी कौआ देखने लगे। इधर सीएजी रिपोर्ट आई नहीं कि उधर घोटाला-घोटाला चिल्लाने लगे। यदि सीएजी ही सब कुछ है तो फिर पीएसी का क्या मतलब है?'
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