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Thursday, August 23, 2012

गाय दौलत की रानी है

    भारत के स्वतंत्र होने से पूर्व महात्मा गाँधी ने यह आश्वासन दिया था कि स्वतन्त्रता के पश्चात् इस देश में तत्काल गोहत्या समाप्त कर दी जाएगी। श्री बिनावा भावे ने जब इसी बात पर अनशन किया था तब भारत सरकार की तत्कालीन प्रधानमंत्री श्रीमती इन्दिरा गाँधी ने उन्हें आश्वासन दिया था कि ‘‘शीघ्र ही गोहत्या बन्द कर दी जाएगी।’’ किन्तु कितने खेद का विषय है कि इसके पश्चात् भी हमारे देश में गोहत्या बन्द नहीं हुई है। पश्चिम बंगाल में तो खुले आम गोहत्या हो रही है। और प्रान्त सरकार मौन है। इसका मुख्य कारण है- ‘‘वोट के लिए मुस्लिम समाज का तुष्टिकरण।’’ इस्लाम धर्म के पैगम्बर हजरत मुहम्मद साहब ने भी कहा था कि ‘‘गाय का दूध रसायन, घी अमृत तथा मांस बीमारी है। एक जगह वह कहते हैं - गाय दौलत की रानी हैं।’’
पर इस्लाम धर्म के अनुयायी उनकी बात पर भी ध्यान न देकर अपने भोजन में गोमांस का प्रयोग कर रहे हैं।
हिन्दू समाज भी इस ओर विशेष ध्यान न देकर चुनाव के समय अपना मत ऐसे राजनैतिक दलों को ही दे रहा है जो गोहत्या रोकने के लिए प्रयत्नशील नहीं है। अतएव यदि हिन्दू समाज वास्तव में गोहत्या रोकना चाहता है तो उसका एकमात्र विकल्प यही है कि वह संकल्प करे कि ऐसे राजनैतिक दलों को चुनाव के समय अपना बहुमूल्य मत नहीं देगा जो गोहत्या रोकने के लिए कृत संकल्प न हों।
आज अपने देश में बहुसंख्यक होकर भी हिन्दू समाज द्वितीय श्रेणी का नागरिक होकर रह गया है। प्रत्येक राजनैतिक दल यह मानकर चलता है कि हिन्दू समाज चूंकि जातिवाद में बंटा हुआ है और चुनाव के समय एकजुट होकर मतदान नहीं करता है इसलिए उनका मत तो बिना किसी प्रयास के उन्हें प्राप्त हो ही जाएगा, जबकि मुस्लिम समुदाय तो चुनाव के समय अपना मत उसी राजनैतिक दल को देगा जो उनके हितों की रक्षा के लिए पूर्ण समर्पित हो। इसी कारण प्रत्येक राजनैतिक दल चुनाव के समय मुस्लिम समाज का मत प्राप्त करने के लिए उन्हें प्रसन्न रखने का भरसक प्रयास करता है। इस संबंध में, मैं एक उदाहरण देना चाहता हूँ:-
मुसलमानों के पवित्र पर्व रमजान के अवसर पर राजनैतिक दल उन्हें इफ्तार की दावत देते हैं और यहाँ तक कि स्वयं भारत सरकार के प्रधानमंत्री भी अपनी ओर से इफ्तार दावत का आयोजन मुस्लिम समुदाय को प्रसन्न करने के लिए करते हैं। जबकि हिन्दुओं के पर्व दीपावली पर तथा अन्य धर्मावलम्बियों के धार्मिक अवसर पर किसी राजनैतिक दल या सरकार की ओर से ऐसी दावत का आयोजन नहीं किया जाता है। यह धर्मनिरपेक्षता के भी विरूद्ध है। धर्मनिरपेक्षता के अनुसार सरकार को ‘‘सर्वधर्म समभाव’’ की नीति का अपनाना चाहिए। धर्मनिरपेक्षता के अन्तर्गत सरकारी धन का उपयोग भी इस कार्य के लिए नहीं हो सकता है, पर हो रहा है। जब तक हिन्दू समजा अपने मतदान का प्रभाव नहीं दिखायेगा तब तक भारतवर्ष में न गोहत्या रूकेगी और न उसका द्वितीय श्रेणी का नागरिक होना। अब हिन्दू समाज स्वयं निर्णय करे कि उसे सदा के लिए यह स्थिति स्वीकार है या इसमें परिवर्तन हो जिसके फलस्वरूप सभी भारतीय नागरिकों को समान दृष्टि से देखा जाए तथा सबकी धार्मिक आस्थाओं को समान आदर किया जाए।
                        लेखकः- विष्णुहरि डालमिया
विश्व हिन्दू परिषद पूर्व अध्यक्ष है।
   

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