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Thursday, October 18, 2012

उत्तर भारत कांपा ठण्ड से

नई दिल्ली। एनसीआर समेत उत्तर भारत में मौसम ने करवट ली है। हल्की बारिश के बाद रात में ठंड शुरू हो गई है। अगले 24 घंटे में जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में हल्की बारिश के आसार हैं। फिर बारिश घटेगी लेकिन तापमान में 19 अक्तूबर तक 2-3 डिग्री की गिरावट दर्ज होगी।
मौसम विभाग के सूत्रों ने की माने तो बारिश कम होने से ही सर्दी में देरी हो रही है। उनर-पश्चिम भारत में अक्तूबर के पहले 15 दिन में सामान्य से 95 फीसदी कम बारिश दर्ज हुई है जबकि दिल्ली में 23 मिमी की बजाय सिर्फ बूंदाबांदी दर्ज हुई है। मौसम विभाग के अनुसार, दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में औसत अक्तूबर के पहले पखवाड़े में 17.8 मिमी बारिश होती है लेकिन कहीं दर्ज नहीं हुई है।
वह जम्मू-कश्मीर में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का प्रभाव देखने को मिल रहा है। अगले 24 घंटे में बारिश/बर्फबारी हो सकती है। इससे एनसीआर समेत उनर भारत के मौसम में अचानक बदलाव आएगा। सोमवार रात तेज ठंडी हवाओं के साथ मंगलवार सुबह हल्की बारिश भी हुई है।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि अमूमन 15 अक्तूबर तक सर्दी शुरू हो जाती है लेकिन इस वर्ष थोड़ी देरी हो रही है। अब मौसम बदलेगा। अगले सप्ताह न्यूनतम तापमान 17-18 डिग्री तक आने की संभावना है। मंगलवार को दिल्ली का न्यूनतम तापमान सामान्य से एक डिग्री नीचे 19.3 डिग्री और अबिाकतम तापमान 31.8 डिग्री दर्ज किया गया।
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सैफ-करीना की शादी पर दारुल उलूम भड़का


सैफ-करीना की शादी पर दारुल उलूम भड़का

भास्कर न्यूज  |  Oct 18, 2012, 07:13AM IST
 
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सैफ-करीना की शादी पर दारुल उलूम भड़का
नई दिल्‍ली। सैफ अली खान और करीना कपूर जहां अपनी शादी का जश्‍न मना रहे हैं, वहीं मुस्लिम समाज इसके खिलाफ हो गया है। उनकी शादी (खास तस्‍वीरें देखें) को इस्लामिक संस्था दारुल उलूम ने नाजायज करार दिया है। संस्‍था का कहना है कि ऐसी शादी तभी जायज मानी जा सकती है जब बीवी और शौहर दोनों मुसलमान हों। एक उलेमा का दावा है कि करीना ने अपने खास मकसद के लिए सैफ अली खान से यह शादी की है। इस्लाम इसकी इजाजत नहीं देता।
इन बातों से बेपरवाह सैफ और करीना गुरुवार को दावत-ए-वलीमा की तैयारी कर रहे हैं। दिल्‍ली में होने वाली यह पार्टी आलीशान होगी और इसमें राष्‍ट्रपति सहित तमाम दिग्‍गजों को न्‍यौता गया है
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केजरीवाल ने घोषित की रिसर्च टीम, अब होगा बड़ा खुलासा

केजरीवाल ने घोषित की रिसर्च टीम, अब होगा बड़ा खुलासा
नई दिल्ली. रॉबर्ट वाड्रा-डीएलएफ प्रकरण और सलमान खुर्शीद के एनजीओ पर हुए खुलासे के बाद अरविंद केजरीवाल की संस्था इंडिया अंगेस्ट करप्शन (आईएसी) के दफ्तर में देशभर से नेताओं व ब्यूरोक्रेट्स के घोटालों से जुड़े दस्तावेजों के आने का सिलसिला तेज हो गया है। 
 थोक के भाव में आ रहे इन दस्तावेजों की पड़ताल व चयन के लिए केजरीवाल ने बाकायदा रिसर्च एंड एनालिसिस विंग का गठन किया है। इस टीम में उच्चकोटि के छह पेशेवर स्वयंसेवी हैं, 
जिसमें एक चार्टर्ड अकाउंटेंट, एक आईआईएम के गेस्ट लेक्चरर, एक आईआईटीयन, एक एडवोकेट, एक जर्नलिस्ट और एक मैनेजमेंट ग्रेजुएट शामिल है। सुरक्षा कारणों से इस ‘खास’ टीम के इन सदस्यों के नाम उजागर नहीं किए गए हैं, लेकिन रिसर्च टीम इस समय करीब एक दर्जन मुद्दों पर काम कर रही है। इनका आने वाले दिनों में खुलासा हो सकता है। संस्था से जुड़ी अश्वथी मुरलीधरन ने बताया कि हर दिन उनके दफ्तर को फोन कॉल्स, पत्र व ई-मेल के जरिए कई दर्जन शिकायतें मिल रही हैं। कुछ लोग व्यक्तिगत रूप से दस्तावेज लेकर भी दफ्तर आ रहे हैं। रिसर्च टीम को कोई भी मुद्दा सौंपे जाने से पहले किसी भी आरोप या शिकायत को संस्था के वरिष्ठ सदस्य प्रशांत भूषण, मनीष सिसौदिया और गोपाल राय सुनते या पढ़ते हैं। जिन आरोपों में जनता का व्यापक हित नजर आता है और पुख्ता सुबूत मिलते हैं, उन्हें रिसर्च टीम को सौंपा जाता है।
ये हैं ‘खास’ टीम में :
 
एक चार्टर्ड अकाउंटेंट, एक आईआईएम का गेस्ट लेक्चरर, एक आईआईटीयन, एक एडवोकेट, एक जर्नलिस्ट और एक मैनेजमेंट ग्रेजुएट
इस तरह बढ़ती है तफ्तीश आगे
 
1. शिकायती दस्तावेज मिलते ही आईएसी के प्रमुख सदस्य इसे देखते हैं। जिन आरोपों में पुख्ता सुबूत मिलते हैं, उन्हें रिसर्च टीम को सौंपा जाता है। 
 
2. टीम आरोपों से जुड़े तथ्यों की जांच के लिए सबसे पहले इंटरनेट के जरिए बैकग्राउंड जुटाती है। स्थानीय स्वयंसेवी मिले तथ्यों का संबंधित सरकारी विभाग से जुड़े अधिकारियों अथवा अन्य स्रोतों से सत्यापन करते हैं।
केजरीवाल ने घोषित की रिसर्च टीम, अब होगा बड़ा खुलासा
3. सीए की जिम्मेदारी यह तय करना है कि किसी भी फंड या मद पर किया गया बेतरतीब खर्च वैध है या अवैध।  एडवोकट संबंधित मामले के कानूनी पहलुओं की तफ्तीश करता है।
 
4. आरोपों में पुख्ता बनाने के लिए यदि और सुबूतों की आवश्यकता है तो रिसर्च टीम खुद मौके पर जाकर सुबूत जुटाती है। बाद में यह टीम एनालिसिस रिपोर्ट तैयार करती है, जो टीम अरविंद के कोर सदस्यों के सामने पेश होती है।
 
5. कोर टीम की बैठक में यह तय होता है कि किस मुद्दे का, किन दस्तावेजों के साथ मीडिया में खुलासा करना है। 
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ब्रिटेन में 'गुजरात का कलंक' कहे गए मोदी, जेठमलानी बनवाना चाहते हैं पीएम

ब्रिटेन में \'गुजरात का कलंक\' कहे गए मोदी, जेठमलानी बनवाना चाहते हैं पीएम
नई दिल्‍ली. वरिष्ठ अधिवक्ता और भाजपा के राज्यसभा सांसद राम जेठमलानी ने बागी तेवर अख्तियार कर लिए हैं। उन्‍होंने पार्टी अध्‍यक्ष नितिन गडकरी की मुसीबत बढ़ा दी है। उन्‍होंने साफ ऐलान किया है कि अगर अरविंद केजरीवाल गडकरी के खिलाफ कोई सबूत पेश करते हैं तो वह (जेठमलानी) केजरीवाल के साथ खड़े होंगे। (कांग्रेस-बीजेपी ने वेदांता से लिया 28 करोड़ का चंदा!
 
हालांकि केजरीवाल द्वारा नितिन गडकरी पर आरोप लगाने के बाद जेठमलानी की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। केजरीवाल ने गडकरी को विदर्भ में किसानों की मौत का जिम्मेदार बता दिया है। अब देखना यह है कि जेठमलानी उनके आरोपों का समर्थन करते हैं या नहीं। इसी बीच बीजेपी ने गडकरी पर लगे सभी आरोपों को निराधार बताया है। 
 
जेठमलानी ने गडकरी को पत्र लिख कर नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद  का उम्मीदवार बनाए जाने की भी मांग की है। राजस्थान से राज्यसभा सांसद जेठमलानी ने पत्र में गडकरी के काम करने के तरीके पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। 
 
इस समय लंदन में मौजूद जेठमलानी ने एक टीवी चैनल से कहा कि यदि अरविंद केजरीवाल पार्टी अध्यक्ष के खिलाफ सबूत पेश करेंगे तो वह केजरीवाल के दावों का समर्थन करेंगे। उन्‍होंने यहां तक कह दिया कि वह भाजपा के अध्यक्ष रहते हुए गडकरी द्वारा लिए गए गलत फैसलों के सबूत भी पेश करेंगे। जेठमलानी ने कहा है कि उन्होंने नितिन गडकरी के खिलाफ भाजपा नेतृत्व को कुछ तथ्य पेश किए थे। 
 
गौरतलब है कि नितिन गडकरी के नाम जेठमलानी का यह दूसरा पत्र है। इससे पहले मई में जब मुंबई में बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई थी तब जेठमलानी ने ऐसा ही पत्र गडकरी को लिखा था। 
 
इसी बीच नितिन गडकरी ने अपनी गुवाहाटी यात्रा टाल दी है और वो बुधवार को दिल्ली में ही रहेंगे। नितिन गडकरी ने बुधवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से भी मुलाकात की है। राष्ट्रपति से मुलाकात के बाद मीडिया ने नितिन गडकरी से जेठमलानी के पत्र पर टिप्पणी मांगी तो गडकरी ने हाथ जोड़कर सवाल टाल दिया।
लंदन से भाजपा को परेशान करने वाली एक और खबर है। फाइनेंशियल टाइम्‍स ने नरेंद्र मोदी की तीखी आलोचना करते हुए कहा है कि उन पर लगे गुजरात दंगों के दाग कभी धुल नहीं सकते।
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चिल्लर टाइप हैं मुझ पर लगे आरोप, राजनीति चमका रहे हैं केजरीवालः गडकरी

चिल्लर टाइप हैं मुझ पर लगे आरोप, राजनीति चमका रहे हैं केजरीवालः गडकरी
नई दिल्‍ली।  अब तक कांग्रेस के केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद और गांधी परिवार के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर आरोप लगाने वाले अरविंद केजरीवाल ने अब भाजपा अध्यक्ष नितिन गडकरी पर किसानों की जमीन हड़पने के आरोप लगाए हैं। वहीं स्वयं पर लगे आरोपों पर सफाई पश करते हुए गडकरी ने कहा है कि उन्होंने जमीन हड़पी नहीं है बल्कि जमीन उन्हें लीज पर मिली है। 
 
स्वयं पर लगे सभी आरोपों को बेबुनियाद करार देते हुए नितिन गडकरी ने कहा, 'मैंने कोई भी गैर कानूनी काम नहीं किया है। हम पर लगाए गए आरोप भाजपा को बदनाम करने की साजिश है। मैं लगातार महाराष्ट्र के किसानों के हितों के लिए काम करता रहा हूं। हमारे समूह का उद्देश्य किसानों की उपज को बढ़ाना है। जिस सिंचाई घोटाले की बात यह लोग कर रहे हैं उसका पर्दाफाश भाजपा ने ही किया है। अरविंद केजरीवाल ने अपनी पार्टी को चमकाने के लिएयह घटिया आरोप लगाए हैं। मैंने कम से कम दस हजार ग्रामीण युवाओं को सीधे फायदा पहुंचाया है। मैं जो कर रहा हूं वो मेरा व्यवसाय नहीं है बल्कि यह मेरे जीवन का मिशन है।' 
गडकरी ने आगे कहा, ''किसान कर्ज मुक्त हों और उनका जीवन बेहतर बने इसके लिए हम को-आपरेटिव काम करते हैं। लेकिन को-आपरेटिव सेक्टर में राजनीतिक हस्तक्षेप होता है इसलिए हमने प्राइवेट लिमिटेड मॉडल पर यही काम किया। जमीन पूर्ति समूह की एनजीओ को मिली है। सरकार ने यह जमीन अधिग्रहित की थी। जमीन बेकार पड़ी थी। यह जमीन हमें लीज पर मिली है और हम यहां से गन्ने की दस लाख पौध तैयार करते हैं और फिर उसे किसानों को दे देते हैं। सरकार ने अनेक स्थानों पर ऐसी जमीनें चैरिटेबल संस्थाओं को दी हैं।' 
गडकरी न आगे कहा, 'मुझ पर लगे आरोप बहुत चिल्लड़ हैं। अरविंद केजरीवाल के आरोप विपक्ष का स्थान हथियाने की साजिश है। कांग्रेस के खिलाफ माहौल बना है, इसका फायदा भाजपा को न हो इसलिए कांग्रेस ने अरविंद केजरीवाल के साथ मिलकर यह षडयंत्र रचा है। मैं किसी भी प्रकार की जांच के लिए हमेशा तैयार हूं।' 
 
सुषमा स्वराज ने कहा, 'पिछले कई दिनों से मीडिया में यह माहौल बनाया जा रहा था कि भाजपा के खिलाफ बहुत जल्द ही भ्रष्टाचार का बड़ा खुलासा किया जाएगा। पहले यह खुलासा 10 तारीख को होने था। और अंततः आज यह  खुलासा हो ही गया। मीडिया ने कहा- किस पर पड़ेगा 'केजरीबम'। मीडिया ने माहौल को सनसनीखेज बनाया लेकिन प्रेस कांफ्रेंस के बाद मीडिया को निराशा ही हाथ लगी। हम बहुत प्रसन्न है क्योंकि हमे मालूम है कि वो कितना भी कोशिश कर ले लेकिन कुछ निकाल नहीं पाएंगे। लेकिन बहुत ज्यादा प्रयत्न करने के बाद भी वो भाजपा अध्यक्ष पर एक भी आरोप नहीं लगा सके। अपनी प्रेस कांफ्रेंस के मंच को उन्होंने राजनीतिक मंच में बदल दिया। देश की हर पार्टी पर उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोप लगा दिए। सिर्फ उन्होंने अपने लिए वोट नहीं माना वर्ना यह प्रेस कांफ्रेंस एक चुनावी रैली होती।'
 
गड़करी पर किसानों की जमीन हड़पने के आरोपों पर सफाई देते हुए सुषमा स्वराज ने कहा, 'पूरी प्रेस कांफ्रेंस के दौरान उन्होंने अपने आरोपों को अंजलि दमानिया के उस झूठे बयान पर केंद्रित करने की कोशिश की जिसमें गडकरी ने कहा था- 'हम चार काम उनके करते हैं और वो चार काम हमारे।' लेकिन वो बहुत कोशिश करके भी तीन आरोप ही लगा सके। नितिन गडकरी पर जमीन हड़पने का आरोप लगाया गया लेकिन यह जमीन गडकरी को नहीं बल्कि उनकी ट्रस्ट को मिली है। पूर्ति स्मृधि सिंचन कल्याणकारी समीति वहां गन्ने का पौध उगाते हैं और फिर उसे विदर्भ के किसानों को दान में देते हैं। वो पौध विदर्भ में 13 रूपये का मिलता है जिसे गडकरी 5 रूपये की सब्सिडी पर देते हैं। उन्होंने नितिन गडकरी के पावर प्लांट पर किसानों की सिंचाई पीने का आरोप लगाया लेकिन सच्चाई यह है कि गडकरी के पावर प्लांट को एक प्रतिशत से भी कम पानी मिलता हैं। हमारी पार्टी का पूरा नेतृत्व और कैडर नितिन जी के पीछे हैं। इस प्रेस कांफ्रेंस से आईएसी की विश्वसनियता पर सवाल खड़े हुए है। अनर्गल आरोप लगाने की कोशिश करने वाली यह प्रेस कांफ्रेंस फ्लॉप साबित हुई है।'  सुषमा स्वराज ने यह भी साफ किया कि इन आरोपों के बाद बीजेपी आईएसी के खिलाफ मानहानि का कोई मामला दर्ज नहीं करेगी बल्कि राजनीतिक लड़ाई लड़ेगी। 
 
वहीं अरुण जेटली ने कहा- 'आज की प्रैस काफ्रेंस भाजपा और कांग्रेस के नैतिक स्तर को को बराबर करने की एक नाकाम कोशिश थी। उनका प्रमुख उद्देश्य कांग्रेस और भाजपा को एक बराबर खड़ा करना था। लेकिन अब कुरेदने से भी हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष पर कोई आरोप साबित नहीं हो पा रहे हैं। उन्होंने बिना राई के ही पहाड़ खड़ा करने की कोशिश की।' 
जेटली ने आगे कहा- सिविल सोसायटियों की समाज को जरूरत होती है लेकिन इंडिया अगेंस्ट करप्शन ने ऐसी संस्थाओं की ही विश्वसनियता समाप्त कर दी है। उन्होंने आज अपने पैर पर ही कुल्हाड़ी मार ली है। 
कांग्रेस प्रवक्ता राशिद अल्वी ने केजरीवाल द्वारा नितिन गडकरी पर लगाए गए आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा-'आज संगीन इल्जाम भाजपा और भाजपा के अध्यक्ष नितिन गडकरी पर लगाए गए हैं। जब हम पर इल्जाम लगाए गए तब भाजपा जश्न मनाती थी और बिना सच को देखे-परखे उनकी आवाज में आवाज मिलाती थी। आज जब उन पर यह इल्जाम लगाए जा रहे हैं तब भाजपा की जिम्मेदारी यह बनती है कि वो देश को सच बताए। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता बिना सही-गलत को जाने सभी इल्जामों को सच मान लेते थे, अब हम पहला मौका भारतीय जनता पार्टी को देते हैं कि वो इन पर सफाई देश को दे।'
 
वहीं राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने अरविंद केजरीवाल की तीखी आलोचना की। अरविंद केजरीवाल के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा- 'यह निष्कासित व्यक्ति है, अन्ना जी ने ठोक-ठका के इसे बाहर निकाल दिया है, यह खुद अन्ना के साथ घोटाला कर चुका है। इस देश में नेता बनने की बीमारी है लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि गाली देकर नेता बनों। तुम्हें कौन जानता है, किसने तुम्हें चुना है। देश के नेताओं को अब इसे जेल में ठुंसवा देना चाहिए।' 
इससे पहले बुधवार शाम पांच बजे दिल्ली के कांस्टीट्यूशन क्लब में मीडिया से बात करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा, 'भारतीय जनता पार्टी इस देश की विपक्षी पार्टी है या फिर उसकी सत्ताधारी पार्टियों के साथ राज्यों में और केंद्र में सांठगांठ हैं। नितिन गडकरी किसके हितों का प्रधिनित्व करते हैं। गडकरी का बहुत बड़ा व्यावसायिक साम्राज्य है। क्या उनके व्यापारिक हित विदर्भ के किसानों के हितों के विरोध में हैं। क्या महाराष्ट्र के अंदर गडकरी के व्यापार किसानों की कीमत पर हो रहे हैं। क्या विदर्भ में किसानों की आत्महत्या की वजह नितिन गडकरी के व्यवसाय हैं। 70 हजार करोड़ रुपये खर्च हो गए लेकिन किसानों का कोई फायदा नहीं हआ। महाराष्ट्र हाईकोर्ट में पीआईएल भी फाइल की गई लेकिन कुछ नहीं हुआ।'
अरविंद ने कहा-'हमारी आरटीआई कार्यकर्ता अंजलि दमानिया द्वारा इकट्ठा किए गए दस्तावेजों से पता चलता है कि महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या के लिए नितिन गडकरी के व्यापारिक हित जिम्मेदार हैं। महाराष्ट्र सरकार नितिन गडकरी के हितों का ध्यान रख रही है।'
अरविंद ने कहा कि किसानों से बांध के लिए अधिग्रहित की गई करीब 100 एकड़ जमीन  महाराष्ट्र सरकार ने नितिन गडकरी को गैरकानूनी रूप से दे दी। अरविंद ने यह भी कहा कि यह जमीन किसानों ने सरकार से वापस मांगी थी लेकिन किसानों को जमीन देने के बजाए जमीन नितिन गडकरी को दे दी गई। अरविंद केजरीवाल ने नितिन गडकरी पर किसानों की जमीन पर कब्जा करने का भी आरोप लगाया।  जिस वक्त यह सब हुआ उस वक्त अजित पंवार महाराष्ट्र के सिंचाई मंत्री थे। 
अरविंद ने यह भी कहा कि किसानों की जमीन की सिंचाई के लिए बनाए गए बांध का सारा पानी नितिन गडकरी की कंपनियों को दिया जा रहा है। 
अरविंद ने कहा कि महाराष्ट्र में 71 पॉवर प्लांट प्रस्तावित हैं। यदि यह पॉवर प्लांट बने तो फिर किसानों को पानी नसीब नहीं हो पाएगा। महाराष्ट्र में एक चलन यह बन गया है कि एक ओर बांध बनता है और दूसरी ओर नेताओं की कंपनियां खड़ी हो जाती हैं। 
अरविंद केजरीवाल ने नितिन गडकरी से सीधा सवाल करते हुए कहा कि गडकरी बताएं कि वो एक व्यापारी हैं या फिर राजनेता हैं? 
अरविंद केजरीवाल ने सभी पार्टियों के नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा, 'हरियाणा में वाड्रा किसानों की जमीन लूट रहे हैं तो महाराष्ट्र में नितिन गडकरी किसानों की जीम हड़प रहे हैं। दोनों पार्टियों के चोटी के नेता देश के किसानों की जमीन लूटने में लगे हुए हैं। दुख की बात यह है कि जब हमने वाड्रा के बारे में खुलासा किया था तब शरद यादव उनके बचाव में सामने आ गए थे। शरद जी एनडीए के संयोजक हैं। अखिलेश यादव ने भी उनका बचाव किया। हमे पता था कि वाड्रा गांधी परिवार के दामाद है लेकिन जिस तरह शरद यादव और अखिलेश यादव उनके बचाव में आए इससे साबित होता है कि रॉबर्ट वाड्रा सभी के दामाद है। सुषमा स्वरजा, अरुण जेटली, रॉबर्ट वाड्रा, मायावती, अखिलेश यादव, सोनिया गांधी, कपिल सिब्बल सभी एक ही परिवार से जुड़े हैं। सरकार किसी की भी हो ठेके सबकी कंपनियों को मिलते हैं, पॉवर प्लांट सभी के लगते हैं।' 
अरविंद ने आगे कहा- हम जानते हैं कि इस मामले में भी सरकार कोई जांच नहीं करवाएगी। लेकिन हम देश की जनता के सामने इन लोगों का सच लाना चाहते हैं। देश को लोग डरे हुए हैं और हम यह खुलासे करके देश के लोगों को व्यवस्था परिवर्तन के खिलाफ तैयार करना चाहते हैं। हम भाजपा या सरकार से कोई मांग नहीं कर रहे हैं। हम सिर्फ देश के लोगों से मांग कर रहे हैं कि जागृत हो जाएं और अपने हितों के लिए लड़े। 
वहीं अन्ना हजारे की एक सहयोगी ने अरविंद केजरीवाल की प्रेस कांफ्रेंस से पहले अंजलि दमानिया को ही सवालों के घेरे में खड़ा किया। कुछ अन्ना समर्थकों ने अरविंद केजरीवाल की प्रेस कांफ्रेंस में हंगामा भी किया। 
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एंग्री मिनिस्टर ऑफ यूपी: इनके गुस्से का कहर, बरपा शहर-शहर

11 अगस्‍त को आजम खां ने लखनऊ के नगर आयुक्‍त एनपी सिंह को निलंबित करने का फरमान सुनाया। दरअसल आजम खां शहर के वीआईपी इलाके में गंदगी देखकर क्षुब्‍ध थे। मंत्री जी ने आदेश तो दे दिया लेकिन जब उस पर किसी ने तामील नहीं किया और नगर आयुक्‍त अपना काम करते रहे तो आजम खां का गुस्‍सा और बढ़ गया और उन्‍हेांने विरोध में दफ्तर आना छोड़ दिया। इसके बाद आखिरकार 2 सितम्‍बर को एनपी सिंह का तबादला करके उन्‍हें प्रतीक्षा सूची में डाल दिया गया। आजम खां शांत हो गए, वह अलग बात थी कि एनपी सिंह को निलंबित करने के उनके फरमान की तामील इस बार भी नहीं की गर्इ।
लखनऊ. वो निकलते हैं तो अफसरों की हालत खराब हो जाती है, जिस इलाके में जाते हैं दो चार को निलंबन थमा आते हैं। अपने 6 महीने के कार्यकाल में प्रदेश के नगर विकास मंत्री आजम खां भ्रष्‍टाचार, अव्‍यवस्‍था, कार्यों में लापरवाही देखकर दर्जनों अफसरों को निलंबित कर चुके हैं। इसी क्रम में पिछले दिनों उन्‍होंने तीन और अफसरों को निलंबित करने व एक के खिलाफ विभागीय कार्यवाही संस्‍तुति कर दी।
 

आइए जानते हैं कब और क्‍यों बिफरे आजम और किस-किसने झेला कहर...

 
23 अप्रैल को आजम खां ने अपने जिले रामपुर में विलासपुर सामुदायिक स्‍वास्‍थ्‍य केंद्र का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान ओपीडी ड्यूटी डॉ रजनीश गुप्‍ता की थी। पता चला कि डॉ गुप्‍ता ओपीडी में कभी नहीं आते। यहां आने की बजाए वह अपनी पत्‍नी के नर्सिंग होम में बैठते हैं। आजम खां ने यहां से सीधा रुख डॉ गुप्‍ता के नर्सिंग होम किया। यहां उन्‍हें डॉ रजनीश गुप्‍ता मरीजों का इलाज करते मिले। इसके बाद आजम खां ने डॉ रजनीश गुप्‍ता को गिरफ्तार करने और उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई के आदेश दिए और वहां से चले गए।
2 जुलाई को आजम खां ने जल निगम के चेयरमैन की हैसियत से 25 वरिष्‍ठ अधिकारियों को सस्‍पेंड कर दिया। आजम के अनुसार उनके खिलाफ भ्रष्‍टाचार और कार्य में लापरवाही की कई शिकायतें आ रही थीं। इनमें चार इंजीनियर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के भी निर्देश दिए।
27 अगस्‍त को आजम खां जब नगर विकास की मीटिंग में पहुंचे तो वहां प्रमुख सचिव प्रवीर कुमार और सचिव सुनीता चतुर्वेदी को अनुपस्थित पाकर बिफर पड़े। इस दौरान एक अफसर ने कुछ बोलने की कोशिश की तो आजम खां ने कहा कि बकवास करते हो, चुप बैठिए, बदतमीज कहीं के। इसके बाद आजम ने मीटिंग ही रद कर दी। आजम खां का कहना था कि जब 27 से 29 तारीख मीटिंग के लिए पहले से ही तय की जा चुकी थी तो इसमें अफसर अनुपस्थित कैसे रह सकते हैं।
14 अक्‍टूबर को प्रदेश के नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खाँ ने इलाहाबाद में कुम्भ मेले की तैयारियों के सम्बन्ध में और अल्पसंख्यक कल्याण की योजनाओं की समीक्षा के दौरान 3 अधिकारियों को निलम्बित करने और एक अधिकारी के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिए। नगर पंचायत, कुण्डा और नगर पंचायत लालगोपालगंज में सड़क किनारे और डिवाइडर पर भीषण गन्दगी पाये जाने पर कुण्डा के अधिशासी अधिकारी एम.एम.जैदी और लालगोपालगंज के अधिशासी अधिकारी जे.पी. मौर्या को निलम्बित करने के आदेश दिये। साथ ही मंझनपुर के पूर्व अधिशासी अधिकारी अनीस अहमद के विरुद्ध गम्भीर शिकायतों को देखते हुये, उनके खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई करने के निर्देश दिये।
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लखनऊ. अखिलेश सरकार ने उत्‍तर प्रदेश सूचना प्रौद्योगिकी नीति 2012 को मंजूरी दे दी है। मुख्‍यमंत्री अखिलेश की अध्‍यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में इस प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी गई। इसके अलावा कैबिनेट ने लख्‍नऊ में आईटी पार्क बनाने के लिए जमीन, प्रदेश के प्रतिष्ठित यश भारती सम्‍मान, परिवहन और बीमा क्षेत्र के कई अहम निर्णय लिए। अखिलेश सरकार ने आईटी पार्क के लिए लखनऊ सुलतान पुर रोड बने गजेरिया फार्म हाउस की 150 एकड़ जमीन को भी आईटी पार्क के लिए ट्रांसफर किया जहां ये आईटी पार्क बनना है। सरकार की इसके पीछे मंशा उत्तर प्रदेश में और ज्यादा औघोगिक निवेश और घरानों को बुलाना है ताकि यूपी में रोजगार के ज्यादा से ज्यादा अवसर पैदा किए जा सकें। पर्यावरणीय दृष्टि से सुरक्षित यह प्रस्तावित आईटी पार्क सभी तरह की सुविधाएं जैसे आईटी टॉवर, बैंक, कॉन्फ्रेंस सुविधा, रेस्तरां, यात्रा सेवाओं, अतिथि गृहों, निर्बाध बिजली की आपूर्ति के लिए उपकेंद्र, निर्यात सुविधाओं, प्रशिक्षण केंद्रों और स्वास्थ्य सुविधाओं से सुसज्जित होगा।आधिकारिक सूत्रों के हिसाब से लगभग 285 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जाने इस परियोजना को 1,30,000 वर्ग मीटर में स्थापित किया जाएगा। जिस के लिए प्रमुख विकासकर्ता का चयन विकासकर्ता चयन समिति द्वारा इसके लिए निर्दिष्ट न्यूनतम मानकों के आधार पर किया जाएगा। कैबिनेट ने जो निर्णय लिए, वह इस प्रकार हैं- 1. शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत, साहित्य एवं ललित कलाओं के लिए दिए जाने वाले ‘यश भारती सम्मान’ की राशि 05 लाख से बढ़ाकर 11 लाख रुपए करने का फैसला। 2. लखनऊ में आईटी सिटी की स्थापना के लिए गंजरिया फार्म की 150 एकड़ भूमि हस्तांतरित करने का निर्णय। 3. उत्तर प्रदेश सूचना प्रौद्योगिकी नीति-2012 को मंजूरी। 4. गाजियाबाद में मेट्रो रेल परियोजना (द्वितीय चरण) के अंतर्गत दिलशाद गार्डेन, नई दिल्ली से नया बस अड्डा गाजियाबाद तक के प्रस्ताव को मंजूरी। 5. हथकरघा बुनकरों के प्रोत्साहन तथा उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए ‘जनेश्वर मिश्र हथकरघा पुरस्कार योजना’ के तहत प्रथम पुरस्कार की राशि 25 हजार रुपए करने का निर्णय। 6. प्रदेश के किसानों का होगा अब 05 लाख रुपए का बीमा। कृषक दुर्घटना बीमा योजना के लिए मार्ग निर्देशों का निर्धारण। 01 अप्रैल, 2012 से योजना प्रभावी। 7. ठेका वाहन परमिट प्राप्त वाहनों के रंग निर्धारित करने का फैसला। इन वाहनों की बॉडी को मैरून, काला या लाल रंग से रंगा जाना प्रतिबंधित। 8. उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश के प्रस्ताव को मंजूरी।

लखनऊ. अखिलेश सरकार ने उत्‍तर प्रदेश सूचना प्रौद्योगिकी नीति 2012 को मंजूरी दे दी है। मुख्‍यमंत्री अखिलेश की अध्‍यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में इस प्रस्‍ताव को मंजूरी दे दी गई। इसके अलावा कैबिनेट ने लख्‍नऊ में आईटी पार्क बनाने के लिए जमीन, प्रदेश के प्रतिष्ठित यश भारती सम्‍मान, परिवहन और बीमा क्षेत्र के कई अहम निर्णय लिए।
 
अखिलेश सरकार ने आईटी पार्क के लिए लखनऊ सुलतान पुर रोड बने गजेरिया फार्म हाउस की 150 एकड़ जमीन को भी आईटी पार्क के लिए ट्रांसफर किया जहां ये आईटी पार्क बनना है। सरकार की इसके पीछे मंशा उत्तर प्रदेश में और ज्यादा औघोगिक निवेश और घरानों को बुलाना है ताकि यूपी में रोजगार के ज्यादा से ज्यादा अवसर पैदा किए जा सकें।
 
पर्यावरणीय दृष्टि से सुरक्षित यह प्रस्तावित आईटी पार्क सभी तरह की सुविधाएं जैसे आईटी टॉवर, बैंक, कॉन्फ्रेंस सुविधा, रेस्तरां, यात्रा सेवाओं, अतिथि गृहों, निर्बाध बिजली की आपूर्ति के लिए उपकेंद्र, निर्यात सुविधाओं, प्रशिक्षण केंद्रों और स्वास्थ्य सुविधाओं से सुसज्जित होगा।आधिकारिक सूत्रों के हिसाब से  लगभग 285 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जाने इस परियोजना को 1,30,000 वर्ग मीटर में स्थापित किया जाएगा। जिस के लिए प्रमुख विकासकर्ता का चयन विकासकर्ता चयन समिति द्वारा इसके लिए निर्दिष्ट न्यूनतम मानकों के आधार पर किया जाएगा।
 
 
कैबिनेट ने जो निर्णय लिए, वह इस प्रकार हैं- 
 
 
1. शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत, साहित्य एवं ललित कलाओं के लिए दिए जाने वाले ‘यश भारती सम्मान’ की राशि 05 लाख से बढ़ाकर 11 लाख रुपए करने का फैसला।
 
2. लखनऊ में आईटी सिटी की स्थापना के लिए गंजरिया फार्म की 150 एकड़ भूमि हस्तांतरित करने का निर्णय। 3. उत्तर प्रदेश सूचना प्रौद्योगिकी नीति-2012 को मंजूरी।
 
4. गाजियाबाद में मेट्रो रेल परियोजना (द्वितीय चरण) के अंतर्गत दिलशाद गार्डेन, नई दिल्ली से नया बस अड्डा गाजियाबाद तक के प्रस्ताव को मंजूरी।
 
5. हथकरघा बुनकरों के प्रोत्साहन तथा उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए ‘जनेश्वर मिश्र हथकरघा पुरस्कार योजना’ के तहत प्रथम पुरस्कार की राशि 25 हजार रुपए करने का निर्णय।
 
6. प्रदेश के किसानों का होगा अब 05 लाख रुपए का बीमा। कृषक दुर्घटना बीमा योजना के लिए मार्ग निर्देशों का निर्धारण। 01 अप्रैल, 2012 से योजना प्रभावी।
 
7.  ठेका वाहन परमिट प्राप्त वाहनों के रंग निर्धारित करने का फैसला। इन वाहनों की बॉडी को मैरून, काला या लाल रंग से रंगा जाना प्रतिबंधित।
 
8. उत्तर प्रदेश नगर पालिका अधिनियम में संशोधन के लिए अध्यादेश के प्रस्ताव को मंजूरी।