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Saturday, September 29, 2012

हंगरी वाली ने सिंगापुरी पर थूका, गंगा किनारे हुई जूतमपैजार

PIX: हंगरी वाली ने सिंगापुरी पर थूका, गंगा किनारे हुई जूतमपैजारPIX: हंगरी वाली ने सिंगापुरी पर थूका, गंगा किनारे हुई जूतमपैजार
PIX: हंगरी वाली ने सिंगापुरी पर थूका, गंगा किनारे हुई जूतमपैजार


वाराणसी. शांति और अहिंसा के प्रतीक भगवान् बुद्ध की शान में आयोजित बुद्धिस्ट कान्क्लेव में हिस्सा लेने आये विदेशी पर्यटक शुक्रवार रात विश्व प्रसिद्द गंगा के घाट पर खुद ही अशांति का कारण बन गए। वाराणसी में आज यानि शनिवार से शुरू होने जा रहे बुद्धिस्ट कानक्लेव में भाग लेने आये सैकड़ो विदेशी अतिथियों के लिए दशाश्वमेध घाट पर कड़ी सुरक्षा में भब्य गंगा आरती का आयोजन किया गया था। यहां किसी  भी गैर आमंत्रित व्यक्ति को प्रवेश नही दिया गया था। फिर भी इसमे हंगामा हो गया।
पुलिस के तमाम सुरक्षा के दावे तब धरे के धरे रह गये जब एक सांड के आजाने से अफरातफरी का माहौल हो गया। बात यही तक नहीं रही अभी दुसरा नाटक भी बाकी था जब हंगरी कि रहने एक महिला  जो गंगा आरती देखने आई थी उसके और दूसरी विदेशी युवती के बीच जम के मारपीट हो गयी। जब दूसरी युवती के पति ने बीच बचाव करने की कोशिश की तो हंगरियन महिला उस से भी उलझ पडी और उसके मुंह पर थूक दिया। गंभीर बात ये है कि यह सब पुलिस के आला अधिकारियो की मौजूदगी में हूआ। हंगरी से आई इजाबेल इस घटना से खासी नाराज है। उसने पुलिस और हंगरी दूतावास में शिकायत करने की बात कही। वही सिंगापूर से आई महिला इस अफरा तफरी का फायदा उठाकर भीड़ में ही कही गम हो गई।
हंगरी की इजाबेल ने बताया कि वह काफी आहत है और पुलिस ने भी उसकी शिकायत नहीं सूनी। जबकि उसकी गलती मात्र इतनी थी कि उसने सीढियों से घाट पर जाने की कोशिश की थी और भारी भीड़ में उसके साथ मारपीट की गई।  

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बीए की परीक्षा में फेल हुए लालू के बेटे

बीए की परीक्षा में फेल हुए लालू के बेटे
पटना.  राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव बीए प्रथम वर्ष की परीक्षा में फेल हो गए हैं। पटना विश्वविद्यालय के बीएन कॉलेज से तेज प्रताप ने राजनीतिशास्त्र (आनर्स) से परीक्षा दी थी। उनको आनर्स फर्स्‍ट पेपर में केवल 39 और सेकेंड पेपर में उससे भी कम (37) नंबर मिले। परीक्षा पास करने के लिए कम से कम 45 नंबर चाहिए थे।
उधर, बिहार में कॉन्‍ट्रैक्‍ट टीचर्स का हंगामा जारी है। शुक्रवार को भी उन्‍होंने मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार की सभा में चप्‍पलें फेंकीं। मधेपुरा के बीएन मंडल स्टेडियम में नीतीश की सभा में शिक्षकों ने मंच की ओर चप्पलें फेंककर विरोध जताया। हालांकि फेंकी गईं चप्पलें मंच तक नहीं पहुंचीं। डी एरिया में गिरीं चप्पलों को मौके पर मौजूद अफसर उठा कर छिपाने लगे। 
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आगरा में दिखेगा मुंबई के 'मरीन ड्राइव' सा नजारा

आगरा में दिखेगा मुंबई के 'मरीन ड्राइव' सा नजारा

आगरा. मुम्बई के मरीन ड्राइव जैसा नजारा अब आगरा में भी दिखेगा। यमुना किनारे करोड़ों की लागत से खूबसूरत पर्यटन पट्टी बनाने की अंतिम तैयारी चल रही है। एत्मादउद्दौला से रामबाग तक 160 करोड़ रुपए की खर्च से यमुना किनारा खूबसूरत बनाया जाएगा।
 यहां पर्यटन और मनोरंजन का संगम देखने को मिलेगा। स्मारकों के साथ-साथ रेस्तरां, फूड कोर्ट, थिएटर और चिल्ड्रेन पार्क आदि विकसित किए जाएंगे। आगरा विकास प्राधिकरण ने इसकी प्रस्‍ताव पर सहमति जता दी है।
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अन्ना ने टीम के टूटने का ठीकरा अरविंद के सिर फोड़ा

अन्ना ने टीम के टूटने का ठीकरा अरविंद के सिर फोड़ा
नई दिल्ली. सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने कभी अपने सबसे भरोसेमंद सहयोगी रहे अरविंद केजरीवाल पर हमला बोला है। हजारे  ने कहा है कि पार्टी बनाने के फैसले के चलते भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा किया आंदोलन बंट गया। उन्होंने कहा कि आंदोलन राजनीति की वजह से विभाजित हुआ। उन्होंने कहा है कि पार्टी बनाने के समर्थन में आने से आंदोलन के तेवर पर असर पड़ा।
अन्ना हजारे ने कहा कि जो पार्टी बनाने के हक में थे, उनसे मेरी असहमति साफ थी। इसके बावजूद मेरे निर्णय के खिलाफ पार्टी बनाने की योजना पर अमल किया गया। अन्ना ने कहा, 'कई लोग कहते हैं कि मैंने पार्टी बनाने पर सहमति दे दी थी लेकिन यह सही नहीं है।
महाराष्ट्र से आने वाले वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता ने अपने ब्लॉग में लिखा है कि पिछले दो सालों में यूपीए सरकार की लाख कोशिश के बावजूद आंदोलन बंट नहीं पाया था। वही आंदोलन बिना सरकार की कोशिश के विभाजित  हो गया। एक ग्रुप के चुनावी राजनीति में जाने का फैसला इसकी प्रमुख वजह रही। अन्ना हजारे ने कहा कि दुर्भाग्य से आंदोलन विभाजित नहीं हुआ होता तो लोकपाल बिल 2014 के आम चुनाव से पहले ही पास हो गया होता। एक ग्रुप ने चुनावी राजनीति में जाने का निर्णय लिया और दूसरा आंदोलन के साथ खड़ा है।
अन्ना हजारे ने इस बात पर दुख जताया कि उन्हें सांप्रदायिक संगठनों के साथ जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा, 'अब तक जीवन में मेरा किसी भी संगठन से कोई रिश्ता नहीं रहा। मैं जीवन के अंतिम सांस तक किसी पार्टी या संगठन का हिस्सा नहीं बनूंगा। हजारे ने कहा कि चुनाव करीब आ रहा है। कुछ पार्टियां मेरा नाम चुनाव में अपने फायदे के लिए इस्तेमाल कर सकती हैं। आंदोलन केवल आंदोलन रहेगा क्योंकि यह पवित्र है
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केन्द्र सरकार की नीति खाना महंगा बात फ्री

आम जनता के मुंह से निवाला निकालकर फोन पर फ्री बात कराने की योजना को अमली जामा पहनाने में जुटी सरकार

एक-दूसरे से बातचीत हमें सशक्त बनाती है, मजबूती देती है, दूरियां घटाती हैः सिब्बल

सचिन धीमान
मुजफ्फरनगर (अलर्ट न्यूज)।
देश की केन्द्र सरकार देश की जनता को जहां एक ओर महंगाई के बोझ में दबाकर भूखा मारने पर उतारू है वहीं दूसरी ओर केन्द्र सरकार ने भूखा मरने को मजबूर देश की जनता के पेट की भूख बातों से मिटाने की योजना को अमलीजामा पहनाने की किवायद शुरू कर दी है। केन्द्रीय दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने टेलीकॉम ऑपरेटरों के साथ की बातचीत में स्पष्ट कर दिया है कि देश की जनता को एक-दूसरे बात करने का पैसा नहीं देना चाहिए। सरकार योजना स्पष्ट देखाई देने लगी है कि सरकार आम जनता के मुंह से निवाला निकालकर फोन पर फ्री बात कराया करेगी। ताकि महंगाई के बोझा में दबा व्यक्ति खाने पीने के समय महंगा खाना खाने की बजाए अपने परिचितों से फोन पर बात कर अपना पेट बातों से भरकर ही रात को सो जाये।
उल्लेखनीय है कि जब जब देश में कांग्रेस की सरकार आयी है तब तब बेलगाम महंगाई आयी है और देश की जनता के सामने भूखा मरने तक की नौबत आ गयी। ऐसा ही नजारा देश में वर्तमान में देखने को मिल रहा है। देश की जनता महंगाई के त्रस्त होने के कारण सडकों पर धरने प्रदर्शन कर महंगाई कम करने के लिए चिल्ला रही है लेकिन देश की सत्तारूढ कांग्रेस सरकार ने विगत दिनों गैस सिलेण्डरों से सब्सिडी खत्म करते हुए गैस सिलेण्डारों के दाम दोगुने से ज्यादा कर दिये है तो वहीं डीजल के दामों में 5 रूपये की बढोत्तरी करते हुए आग लगा दी थी। जिसके बाद देश की जनता व किसानों के सामने भूखे मरने की नौबत आ खडी हुई और व्यापारियों सहित आम जन सडकों पर आ गया और केन्द्र सरकार व सोनिया गांधी के पुतले आदि फूंकते हुए गैस सिलेण्डर व डीजल के बढे हुए दामों को वापिस लेने की मांग की लेकिन देश के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बढे हुए दामों को वापिस मना कर दिया और साथ ही देश की जनता को अपना पद की गरिमा और अपनी छोटी सोच का परिचय देते हुए कहा कि पैसे पेड पर नहीं लगते है जिससे देश की जनता को बडा झटका लगा। जिससे स्पष्ट प्रतीत होने लगा है कि केन्द्र सरकार जानबूझकर देश की जनता के ऊपर गैस सिलेण्डरों व डीजल के दामों में बढोत्तरी करते हुए महंगाई का बोझ डाल रही है। देश की जनता को दूसरा झटका शनिवार को उस समय लग गया जब देशवासियों को खबर मिली कि गैस सिलेण्डरों से पूरी तरह अगले सात तक सब्सिडी खत्म करते हुए गैस सिलेण्डरों के दामों में एक बार फिर 50 रूपये व डीजल के दामों में 4 रूपये की बढोत्तरी हो सकती है।
 वित्त आयोग के पूर्व चेयरमैन एवं केलकर समिति के अध्यक्ष विजय ने  डीजल के भाव में चार रुपए प्रति लीटर और गैस की कीमत में ५० रुपए प्रति सिलेंडर इजाफा करने की सिफारिश की है। साथ ही अनाज और खाद की कीमत पर से सब्सिडी खत्म करने को कहा है। इसने डीजल और एलपीजी पर अगले साल तक सब्सिडी पूरी तरह खत्म करने को कहा है। साथ ही २०१४-१५ तक केरोसिन की सब्सिडी में एक तिहाई कमी करने की जरूरत बताई है। इसके दाम में भी दो रुपए प्रति लीटर बढ़ाने की सिफारिश की है।
वहीं जनता को एक बडा शॉट उस समय लग गया जब पता चला कि सरकार गैस, अनाज, खाद, डीजल व एलपीजी से सब्सिडी खत्म कर कर फोनों पर बात फ्री कराने की योजना बनाये जाने का पता चला। इस खबर से लोगों के दिलों की धडक्कने भी अभी से रूकनी शुरू हो गयी है। 
गौरतलब है कि केंद्रीय दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल ने टेलीकॉम ऑपरेटरों के बीच नई बहस छेड़ते हुए सीआईआई की ओर से आयोजित ब्रॉडबैंड समिट में उन्होंने कहा, यह दुर्भाग्य की बात है कि हमें आज भी बातचीत पर पैसा देना पड़ता है। आखिर हम बातचीत के लिए पैसा क्यों दें। ऑपरेटर आखिर एक-दूसरे से बातचीत करने पर चार्ज क्यों करते हैं।’’ उन्होंने ऑपरेटरों को सलाह दी कि वे बातचीत मुफ्त करने की दिशा में सोचें साथ यह भी कहा कि लेकिन यह असंभव भी नहीं है। परंतु आय के लिए कंपनियों को डाटा सर्विस की ओर देखना चाहिए। सिब्बल ने कहा कि उन्हें मानसिकता बदलने की जरूरत है। अभी आय के लिए सिर्फ बातचीत पर ध्यान केंद्रित किया गया है। डाटा सर्विस से बेहतर आय हो सकती है। ऑपरेटरों को इस दिशा में बढऩा होगा। आय के लिए बातचीत पर निर्भर रहने की मानसिकता बदलनी होगी। सिब्बल ने कहा कि एक-दूसरे से बातचीत हमें सशक्त बनाती है, मजबूती देती है, दूरियां घटाती है। इस पर आखिर पैसा क्यों लगना चाहिए? उन्होंने कहा कि सरकार ब्रॉडबैंड को विस्तार देगी। इसके लिए सरकार हजारों करोड़ रुपए खर्च कर रही है। जल्द ही आकाश-२ का प्रस्ताव भी कैबिनेट के पास भेजा जा रहा है, जिससे जल्द ही छात्रों के हाथ में ५० लाख नए आकाश आ पाए। केन्द्रीय मंत्री सिब्बल की इस बात से लगने लगा है कि कांग्रेस सरकार देशवासियों को खाने पीने की वस्तुओं पर महंगाई बढाकर आम जनता को भूखा मरने पर विश्वस करने के साथ ही उनकी भूख को फोन पर फ्री बात करा मिटाने की योजना में है परंतु केन्द्रीय मंत्री सिब्बल को शायद यह मालूम नहीं है कि एक दूसरे से बात करने से न तो मजबूती देती है और न ही सशक्त बनाती है परंतु यदि व्यक्ति तीनों समय भरपूर भोजन करता है तो करता है तो वह एक मजबूत व शक्तिशाली बन सकता है और उसकी सोचने समझने और कार्य करने की क्षमता भी बढ जाती है जो देश की तरक्की के लिए ज्यादा से ज्यादा सोच समझकर सही कार्य कर सकता है। 
वहीं दूसरी ओर लोगों का कहना है कि सरकार एलपीजी व डीजल से पूरी तरह सब्सिडी खत्म करने व अनाज, खाद से सब्सिडी खत्म करने की बात इसलिए उठा रही है ताकि अनाज, खाद, एलपीजी व डीजल से सब्सिडी खत्म कर देश में लायी गयी एफडीआई से लोग सामान खरीदने लगे ओर देखते ही देखते सन् 1947 से पूर्व की भांति एक बार फिर भारतीय विदेशियों के गुलाम हो जाये।
लोगों का कहना है कि फ्री बात करने से लोगों को जीने के लिए शक्ति प्राप्त नहीं होती है परंतु जब वह भोजन करेगा तभी जिंदा रह सकता है और बात भी कर सकता है यदि इंसान भोजन ही नहीं करेगा तो वह फ्री बात ही क्या कर पायेगा।

जनता की जेब कर खाली सरकार खाती है आठ हज़ार की थाली

PICS:जनता की जेब कर खाली सरकार खाती है आठ हज़ार की थाली!
नई दिल्ली. पीएम ने कहा था कि पैसे पेड़ पर नहीं उगते। इस सनातम सत्य की दुर्लभ व्याख्या पर तो आप रीझ गये होंगे। लेकिन जरा मंदी की कलम से लिखी गई मंत्रियों के मौज की कहानी को पढ़िए। सरकार के लिए तो पैसे पेड़ पर ही उगते हैं। कम से कम आरटीआई के तहत मिली दो जानकारियां तो यही कहती हैं। यूपीए सरकार की तीसरी वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री द्वारा आयोजित डिनर में हर थाली का खर्च आया करीब आठ हजार रुपए। यही नहीं मंत्रियों के विदेश दौरों पर खर्च भी 2011-12 में 12 गुना तक बढ़ गया। महंगाई का रोना केंद्र सरकार हर पल रोती है। कांग्रेस का हाथ आद आदमी के साथ का प्रचार जोर शोर से चलता है। आरटीआई एक्टिविस्ट रमेश शर्मा ने 22 मई की डिनर पार्टी के खर्च की जानकारी मांगी थी। उन्हें बताया गया कि प्रधानमंत्री आवास पर हुए डिनर का इंतजाम सत्कार संस्था के पास था। करीब 603 मेहमान बुलाए गए। इनमें से 375 ही आए। कैटरिंग पर खर्च हुआ 11 लाख 34 हजार 296 रुपए। शामियाने पर 14 लाख 42 हजार 678 रुपए। फूलों के इंतजाम पर 26 हजार 444 रुपए। यानी कुल खर्च 28 लाख 95 हजार 503 रुपए। इसका भुगतान केंद्रीय लोकनिर्माण विभाग और विदेश मंत्रालय के सत्कार-अनुदान से किया गया।परोसे गए 56 भोग डिनर में मेहमाननवाजी के लिए वेज-नॉन वेज दोनों व्यंजन थे। डिनर से पहले भी तरबूज का रस, नारियल पानी, आम का पना, जलजीरा और फ्रूट पंच के साथ भुने हुए काजू और बादाम। कुल 56 पकवान मेहमाननवाजी के लिए शामिल थे। विदेश यात्राओं पर पिछले साल 678 करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च केंद्रीय मंत्रियों ने पिछले साल 678 करोड़ 52 लाख रुपए विदेश यात्राओं पर खर्च किए। वर्ष 2010-11 में ऐसी यात्राओं पर 56 करोड़ 16 लाख रुपए खर्च हुए थे। मतलब इस बार खर्च 12 गुना बढ़ गया। जबकि बजट में इसके लिए सिर्फ 46 करोड़ 95 लाख रुपए ही रखे गए थे। आरटीआई एक्टिविस्ट सुभाषचंद्र अग्रवाल ने यह जानकारी निकाली है। गृह मंत्रालय ने उन्हें जानकारी मुहैया कराई। सबसे ज्यादा दौरे विदेश मंत्री एसएम कृष्णा (15) ने किए। फिर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह (14), वाणिज्य मंत्री आनंद शर्मा (आठ) और पर्यटन मंत्री सुबोधकांत सहाय (पांच) का नाम आता है।
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सिर्फ 5 मिनट में जानिए अपने देश के हजारों साल का इतिहास


दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र का इतिहास हम आपको इस वीडियो में दिखा रहे हैं वह भी महज 5 मिनट में। सबसे पहले दक्षिण भारत में मनुष्य आए।

सिंधु घाटी सभ्यता
सिंधु घाटी सभ्यता 3300-1700 ई.पू. विश्व की प्राचीन नदी घाटी सभ्यताओं में से एक प्रमुख सभ्यता थी। यह हड़प्पा सभ्यता और सिंधु-सरस्वती सभ्यता के नाम से भी जानी जाती है। इसका विकास सिंधु और घघ्घर/हकड़ा (प्राचीन सरस्वती) के किनारे हुआ।
भारत में आर्य करीब 2000-1500 ई.पू. के करीब भारत में आए। 
वैदिक काल 1500 से 500 ई.पू. मानते हैं।
महावीर का जन्म 599 ई.पू. में हुआ था।
राजकुमार सिद्धार्थ जो महात्मा बुद्ध के नाम से प्रसिद्ध हुए। इनका जन्म 563 में हुआ।
सिकंदर ने 326 ई.पू. में भारत पर आक्रमण किया।
इतिहास एक अलग जगह बना चुका कलिंग युद्ध 261 ई.पू. हुआ। 
मौर्य साम्राज्य 324 से 185 ई.पू. रहा। चेरा, चोला, पन्ड्या साम्राज्य 300 ई.पू. तक रहा। गुप्त साम्राज्य 300 से 550 ई. तक रहा।
1 हजार ई. में उत्तर भारत में महमूद गजनवी तो दक्षिण भारत में राजा राजा का शासन चला। 1206 ई. से 1526 तक दिल्ली सुल्तनत। 1526 से 1858 तक मुगल सल्तनत चली।
1600 ई. में इस्ट इंडिया कंपनी भारत पहुंची। पहला स्वतंत्रता संग्राम 1857 में हुआ। जालियावाला बाग हत्याकांड 1919 में हुआ। 1930 में नमक सत्याग्रह और 15 अगस्त 1947 को हमारा देश आजाद हो गया।
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