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Sunday, October 28, 2012

खुर्शीद बने विदेश मंत्री, बंसल को मिली रेल लेकिन दिग्गी दुखी

नई दिल्ली. चुनावी मौसम और आए दिन लगते भ्रष्टाचार के आरोपों से परेशान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लंबी जद्दोजहद के बाद आखिरकार रविवार को अपनी कैबिनेट में बड़ा फेरबदल किया। विवादों से घिरे होने के बावजूद सलमान खुर्शीद नए विदेश मंत्री बनाए गए हैं जबकि अश्विनी कुमार को कानून मंत्री बनाया गया है। भ्रष्‍टाचार के आरोपों से घिरे पूर्व कानून मंत्री खुर्शीद हिमाचल से ताल्‍लुक रखने वाले दिग्‍गज कांग्रेसी नेता आनंद शर्मा पर भारी पड़े हैं। इससे पहले शर्मा को विदेश मंत्रालय दिए जाने की अटकलें थीं।
 खुर्शीद बने विदेश मंत्री, बंसल को मिली रेल लेकिन दिग्गी दुखी
 
 
पवन कुमार बंसल को रेल मंत्री बनाया गया है। एम. वीरप्‍पा मोइली नए पेट्रोलियम मंत्री बनाए गए हैं। इससे पहले यह मंत्रालय जयपाल रेड्डी के पास था जिन्‍हें अब साइंस एंड टेक्‍नोलॉजी और अर्थ साइंसेज मिनिस्‍ट्री का जिम्‍मा सौंपा गया है। राज्‍य मंत्री ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया को बिजली मंत्रालय का स्‍वतंत्र प्रभार जबकि सचिन पायलट को कॉरपोरेट अफेयर्स का स्‍वतंत्र प्रभार दिया गया है।
 
राष्‍ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने रविवार को 22 नए मंत्रियों को शपथ दिलाई। इनमें 17 नए चेहरे शामिल हैं। राष्‍ट्रपति भवन के अशोका हॉल में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में पीएम, सोनिया गांधी सहित सत्‍ता-पक्ष और विपक्ष के तमाम नेता मौजूद थे लेकिन दो दिन पहले विदेश मंत्री के पद से इस्‍तीफा देने वाले एस एम कृष्‍णा समारोह में नहीं दिखे। पांच  सांसदों ने कैबिनेट मंत्री के तौर पर शपथ ली जबकि 15 ने राज्‍यमंत्री के तौर पर शपथ ली। इनमें दो ने स्‍वतंत्र प्रभार वाले राज्‍यमंत्री के तौर पर पर शपथ ली।
 
यूपीए सरकार में व्यापक फेरबदल से पहले विदेश मंत्री कृष्णा समेत सात मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया। अब संगठन में भी बड़े पैमाने पर बदलाव की तैयारी है। कैबिनेट में फेरबदल के तहत मनमोहन सिंह 17 नए चेहरों के साथ 2014 के आम चुनाव तक नई पारी खेलने के लिए तैयार हैं। उनकी टीम में कई पुराने चेहरों का महत्व कायम रखा गया है, वहीं कई अन्य के मंत्रालयों पर गाज गिर गई है। पीएम की कैबिनेट में शामिल किए गए नए मंत्रियों में सबसे अधिक दक्षिण भारत से हैं।
 
वहीं मंत्रिमंडल में फेरबदल से कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह नाराज है। प्रतिक्रिया देते हुए दिग्विजय सिंह ने कहा, 'केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल से मध्यप्रदेश कांग्रेस को निराशा हाथ लगी है,  हम निराश जरूर हैं लेकिन हमारा उत्साह कम नहीं हुआ है। हम पूरे जोश से काम करते रहेंगे।'
खुर्शीद बने विदेश मंत्री, बंसल को मिली रेल लेकिन दिग्गी दुखी
अभी संगठन में ही काम करेंगे राहुल 
शपथ ग्रहण के बाद पीएम मनमोहन सिंह ने कहा कि यूपीए-2 सरकार की कैबिनेट में यह आखिरी फेरबदल है। उन्‍होंने कहा कि नई कैबिनेट में युवा और अनुभवी मंत्रियों का अच्‍छा कॉम्बिनेशन है। उन्‍होंने भरोसा दिया कि आम चुनाव वक्‍त से पहले नहीं होंगे।
कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी के बारे में पीएम ने कहा कि वह चाहते थे कि राहुल गांधी भी कैबिनेट में शामिल हों लेकिन वह अभी संगठन में रहकर काम करना चाहते हैं। 
खुर्शीद बने विदेश मंत्री, बंसल को मिली रेल लेकिन दिग्गी दुखी
रविवार को शपथ लेने वाले मंत्रियों के विभाग
 
कैबिनेट मंत्री: के रहमान खान (अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण), दिनशा पटेल (खनन) , अजय माकन (आवास एवं शहरी गरीबी उन्‍मूलन), पल्‍लम राजू (मानव संसाधन विकास), अश्विनी कुमार (कानून मंत्री), हरीश रावत (जल संसाधन) और चंद्रेश कुमारी (संस्‍कृति)। 
 
राज्‍य मंत्री: मनीष तिवारी (सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय, स्‍वतंत्र प्रभार), चिरंजीवी (पर्यटन, स्‍वतंत्र प्रभार), शशि थरूर (मानव संसाधन विकास), के सुरेश (श्रम एवं रोजगार), तारिक अनवर (कृषि एवं खाद्य प्रसंस्‍करण), सूर्य प्रकाश रेड्डी (रेल), रानी नारा (जनजातीय मामले), ए आर चौधरी (रेल), ए एच खान चौधरी (स्‍वास्‍थ्‍य एवं परिवार कल्‍याण), सर्व सत्यनारायण (सड़क परिवहन), नीनोंग इरिंग (अल्‍पसंख्‍यक कल्‍याण), दीपा दासमुंशी (शहरी विकास), बलराम नायक (सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता),  के कृपा रानी (संचार एवं सूचना प्रोद्यौगिकी, लालचंद कटारिया (रक्षा)। 
 

मंत्रियों में मची सरकार से दूर जाने की होड़ 

 
मंत्रिमंडल में फेरबदल से पहले सात मंत्रियों ने इस्तीफे दे दिए। शनिवार को तीन कैबिनेट और तीन राज्य मंत्रियों ने इस्तीफे सौंप दिए। इन कैबिनेट मंत्रियों में अंबिका सोनी, मुकुल वासनिक, सुबोधकांत सहाय और राज्य मंत्रियों में महादेव खंडेला, अगाथा संगमा और विन्सेंट पॉल शामिल हैं।
 
सूचना और प्रसारण मंत्री के पद से इस्तीफा दे चुकी अंबिका सोनी को संगठन में गुलाम नबी आजाद की जगह महासचिव बनाया जाएगा। गुलाम नबी आजाद सिर्फ मंत्री रहेंगे। अभी वह पार्टी के महासचिव भी है। सूत्रों के अनुसार अंबिका सोनी को जल्द ही गुलाम नबी आजाद के प्रभाव वाले राज्य भी दिए जा सकते हैं।

खुर्शीद बने विदेश मंत्री, बंसल को मिली रेल लेकिन दिग्गी दुखी

सरकार में पहले से शामिल इन मंत्रियों के विभाग बदले हैं- 

 
कैबिनेट मंत्री
 
वीरप्‍पा मोइली (पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस), एस जयपाल रेड्डी (साइंस एंड टेक्‍नोलॉजी), कमलनाथ (शहरी विकास एवं संसदीय कार्य), व्‍यालार रवि (अप्रवासी भारतीय मामले), कपिल सिब्‍बल (संचार एवं सूचना तकनीकी), सीपी जोशी (सड़क परिवहन और हाईवे), कुमारी शैलजा (सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता), पवन बंसल (रेल),  सलमान खुर्शीद (विदेश),  जयराम रमेश (ग्रामीण विकास) 
 
राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार)
 
ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया (बिजली), के एस मुनियप्‍पा (माइक्रो, स्‍मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज), भरतसिंह सोलंकी (ड्रिंकिंग वाटर एंड सेनिटेशन), सचिन पायलट( कॉरपोरेट अफेयर्स), जितेंद्र सिंह (युवा मामले एवं खेल)
 
राज्‍य मंत्री 
 
ई अहमद (विदेश), डी पुरंदेश्‍वरी (वाणिज्‍य एवं उद्योग), जितिन प्रसाद (रक्षा एवं मानव संसाधन विकास), एस जगतरक्षकन (न्‍यू एंड रिन्‍यूएबल एनर्जी), आर पी एन सिंह (गृह), के 
सी वेणुगोपाल (नागरिक उड्डयन), राजीव शुक्‍ला (संसदीय कार्य एवं योजना) 
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के. रहमान खान
 
कर्नाटक से कांग्रेस सांसद के. रहमान खान राज्‍य सभा के डिप्‍टी चेयरमैन रह चुके हैं। रहमान खान 1978 में पहली बार कर्नाटक विधान परिषद के सदस्‍य बने थे। वह कर्नाटक राज्‍य अल्‍पसंख्‍यक आयोग के चेयरमैन रह चुके हैं। वह अप्रैल 1994 में पहली बार राज्‍य सभा के लिए निर्वाचित हुए।
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चंद्रेश कुमारी 
 
चंद्रेश कुमारी कटोच फिलहाल जोधपुर से कांग्रेस सांसद हैं। 1996 में वह राज्‍यसभा के लिए निर्वाचित हुई थीं। उस वक्‍त उन्‍हें सदन में कांग्रेस पार्टी का डिप्‍टी चीफ ह्विप बनाया गया था। वह 1984 में भी लोकसभा के लिए चुनी गई थीं। चंद्रेश हिमाचल प्रदेश सरकार में भी मंत्री रह चुकी हैं। 
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चिरंजीवी 
 
अभिनेता से नेता बने चिरंजीवी ने अपनी पार्टी प्रजा राज्यम का कांग्रेस में विलय कर दिया था। विलय के बाद 18 विधायकों की बदौलत आंध्र प्रदेश की कांग्रेस सरकार की स्थिरता पक्की कर दी गई। 22 अगस्त, 1955 को जन्‍मे चिरंजीवी तेलुगु एवं हिन्दी फ़िल्मों के एक अभिनेता हैं। इन का वास्तविक नाम है, कोणिदेल शिव शंकर वर प्रसाद। इन्होंने अभी तक तीन हिन्दी फिल्मों में काम किया है। बॉलीवुड और टॉलीवुड के मशहूर अभिनेता चिरंजीवी को सात बार दक्षिण भारतीय फिल्मफेयर अवॉर्ड और चार बार नंदी अवॉर्ड से नवाजा जा चुका है। अपनी पहली हिंदी फिल्म प्रतिबंध के लिए भी चिरंजीवी को फिल्मफेयर अवॉर्ड के लिए नामित किया जा चुका है। आंध्र प्रदेश के ओगोले स्थित सीएसआर शर्मा कॉलेज से बारहवीं की परीक्षा पास की। चिरंजीवी ने कॉमर्स विषय के साथ स्नातक उपाधि ग्रहण की। पढ़ाई पूरी करने के बाद चिरंजीवी चेन्नई आ गए। उन्होंने अभिनय सीखने के लिए मद्रास फिल्म इंस्टिट्यूट में दाखिला ले लिया। वर्ष 1980 में चिरंजीवी ने सुरेखा से शादी की। चिरंजीवी की दो बेटियां और एक बेटा रामचरण तेजा हैं। चिरंजीवी ने पुनाधिरल्लू फिल्म के साथ अपने करियर की शुरुआत की, हालांकि प्रणाम खरीदू फिल्म पहले प्रदर्शित हुई। प्रख्यात निर्देशक बापू की फिल्म मना पूरी पंडावुलू ने चिरंजीवी को पहचान दिलवाई।
खुर्शीद बने विदेश मंत्री, बंसल को मिली रेल लेकिन दिग्गी दुखी
डी. पुरंदेश्वरी
 
आंध प्रदेश की विशाखापट्टनम सीट की सांसद डी. पुरंदेश्वरी कांग्रेस की सांसद हैं। 22 अप्रैल, 1959 को चेन्‍नई में जन्‍मीं डी. पुरंदेश्वरी पहली बार कांग्रेस की सीट से ही 14 वीं 
 
लोकसभा में पहुंची थीं। इसके बाद वे 2009 के आम चुनाव में आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम चुनाव क्षेत्र से 15 वीं लोकसभा के लिए सदस्य निर्वाचित हुईं। 
 
 
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बाबा रामदेव ने बदला चौला, योगगुरू से बन बैठा किसान हितैषी

भगवा चौला पहनने वाले बाबा रामदेव दिखाई दिये किसानों की पगडी में, योग गुरू को याद आ गयी किसानों की

सचिन धीमान
सहारनपुर (अलर्ट न्यूज)। देश के अमीर लोगों से मिलकर बात करने वाले बाबा रामदेव को अब किसानों व आम जनता की याद आनी शुरू हो गयी है।
उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ माह पहले तक पंतजली के संस्थापक एवं विश्व विख्यात योग गुरू बाबा रामदेव के पास देश की आम व गरीब जनता से बात न करने व मिलने का समय भी नहीं होता था। परंतु विगत दिनों दिल्ली में रामदेव द्वारा केन्द्र सरकार के खिलाफ खोले गये आंदोलन के बाद जब उनके पैसों वाले अमीर समर्थक उनके पीछे भीड जुटाने में असमर्थ दिखाई देने लगे है और वहीं दूसरी ओर बाबा रामदेव के पीछे पडी केन्द्र की सत्तारूढ कांग्रेस सरकार द्वारा उनका पीछा न छोडने के कारण तथा योग पीठ पंतजली में भी कांग्रेस सरकार द्वारा छापे लगवाये जाने की घटना के बाद जब उनके अमीर समर्थकों ने उनका साथ नहीं दिया तो बाबा रामदेव को अब देश की गरीब आम जनता ही दिखाई देने लगी है। जिसका उदाहरण रविवार को पंतजली योग पीठ के तत्वाधान में आयोजित किसान महापंचायत में देखने को मिला। जो योग गुरू विगत दिनों तक योग के नाम पर सभाओं का आयोजन करते थे वे अब योग शिविरों से निकलकर किसानों की पंचायतों के नाम पर सभाएं लगाने लगे। वहीं दूसरी ओर लोगों को यहां तक कहते सुना गया कि बाबा रामदेव की योग विद्या मानो कांग्रेस सरकार ने छिन ली हो और अब योग गुरू योग सिखाने की बजाए अब किसानों के बीच उतरकर किसानों की बात कर अपने आपको कांग्रेस व केन्द्र सरकार से बचाने में जुट गये है। बाबा रामदेव के अमीर घराने के पैसे वाले समर्थक उनके आसपास मंडराते दिखाई नहीं दे रहे है। जिस कारण बाबा रामदेव को किसानों की बात करने से भीड जुटाने का फार्मुला दिखाई दिया जो पहली ही बार में विफल नजर आया। पंतजली के योग पीठ द्वारा आयोजित किसान महापंचायत में भीड न जुटने के कारण योग गुरू बाबा रामदेव के चेहरे पर खुशी भी नजर नही ंआयी थी। पूरा पंडाल खाली खाली दिखाई दे रहा था। हर कोई यही कहता नजर आया कि बाबा रामदेव जो कल तक योग सिखाने की बात करते थे और अमीरों के साथ बैठकर उनकी ही बात रखते थे वह आज अचानक भगवा पहनावे से किसानों की पगडी में कैसे नजर आये यह बात किसी को भी पच नहीं रही है। यहां तक किसान क्षेत्र के किसानों की माने तो बाबा रामदेव अपने आपको कांग्रेस से बचाने के लिए और अपने पीछे भीड दिखाकर केन्द्र की सत्तारूढ कांग्रेस सरकार के जाल में फंसने से बचने का प्रयास कर रहे है। बाबा रामदेव की इस किसान महापंचायत को देखकर हर कोई आश्चार्यचकित है।

भारत गरीब नही है इसको कांग्रेसी लुटेरो ने लूट कर गरीब कर दियाः रामदेव

कांग्रेस राश्ट्र घाती हैः बाबा

देष से यदि बेईमान खत्म हो जाये तो मंहगाई स्वंय ही समाप्त हो जायेगी

 नरेश कुमार विश्वकर्मा
सहारनपुर (अलर्ट न्यूज)।  भारत गरीब नही है इसको कांग्रेसी लुटेरो ने लूट कर गरीब कर दिया है। देष का चार सो लांख करोड रूपया विदेषी बैंको मे जमा किया गया है यदि वह देष मे वापस लाया जाये तो उससे इतना सोना आजाए की पूरे भारत की धरती पर सोने की परत चढाई जा सकती है। जबकि किसानों के देष में इस समय देष का किसान 10 हजार करोड का कर्जबंद है। उक्त बाते जनपद के विष्वविख्यात धर्मनगरी देवबंद के देवीकुण्ड प्रांगण में आयोजित किसान महापंचायत में बोलते हुए योगगुरू बाबा रामदेव ने कही।
पंतजली योग पीठ के सौजन्य से जनपद के देवबंद स्थित देवीकुण्ड पर आयोजित किसान पंचायत में उपस्थित भीड तो सम्बोधित करते हुए योग गुरू रामदेव जी ने कहा कि किसानों के देष मे किसान ही सबसे पिछडा है वह आर्थिक लडाई लड रहा है। उसको उसकी फसल का उचित मूल्य नही मिल रहा है। सरकार की गलत नीतियों के कारण किसान कर्ज से डूब रहा है। इस समय देष का किसान 10 हजार करोड का कर्जबंद है। गुरू रामदेव ने कहा कि देष मे 20 हजार लाख करोड की सम्पदा है तथा बजट मात्र 200 लांख करोड बनता है फिर भारत गरीब कहा है। भारत गरीब नही इसको तो इन नेताओं ने लूटकर गरीब बना दिया है। इनके द्वारा 50 मिलियन इन कोयला फ्री मंे दे दिया गया जिसकी कीमत 400 लाख करोड रूपये बैठती है। सरकारों मे बैठे लोगो के द्वारा लूट मचाई जा रही है। जिसका उदाहरण जनता के सामने टू.जी, कोयला और सी.बी.सी. घोटालो के रूप मे आ चुका है। बाबा रामदेव ने कहा कि जिन लोगों ने देष की आजादी के लिए प्राण दिये उनका कोई पता नही और कांग्रेस के लुटेरे देष को लूट रहे है। उन्होने कहा कि देष को आजाद कराने मे सात लाख लोगों ने अपने जीवन का बलिदान दिया था। स्वामी जी ने कहा 14 अगस्त 1947 मे देष आजाद हुआ और तभी से इन्होने देष को लूटना प्रारम्भ कर दिया था। यदि देष मे लूट न होती तो आज देष को दस गुणा लाभ होता। सरकार मंहगाई बढाकर देष को लूट रही है, आज चार सौ रूपये का गैस सिलेण्डर एक हजार बारह सौ रूपये मिल रहा है। उन्होनंे कहा कि आज हर गृहणी रोटी बनाते सोनिया गांधी को गाली देती है।
     उन्होने कहा कि गैस का 80 प्रतिषत देष मे पैदा होता है। गैस का भाव देष मे दो सौ- ढाई सौ रूपये सिलेण्डर से अधिक नही बनता है। इसी प्रकार डीजल और पैट्रोल की स्थिति है जो तीस, चालीस रूपये लीटर से अधिक नही बनता है परन्तु सरकार ने टैक्स लगाकर मंहगा किया हुआ है। इस प्रकार सरकार लगातार मंहगाई बढा रही है। उन्होने कहा कि कांग्रेस राश्ट्र घाती है। उन्होने साफ-साफ कहा कि देष से यदि बेईमान खत्म हो जाये तो मंहगाई स्वंय ही समाप्त हो जायेगी। उन्होने कहा कि देष मे बिजली पैदा करने के बाद मूल्य डेढ-दो रूपये यूनिट बैठता है और सरकार छः रूपये यूनिट मूल्य वसूल रही है। उन्होने कहा कि किसान को उसकी फसल का लाभकारी मूल्य मिलना तो दूर की बात लागत मूल्य भी नही मिल रहा है। उन्होने कहा कि यदि किसान को सही मूल्य मिले तो भाव डेढ से दुगना मिल सकता है। बाजार मे भाव न बढे इसके लिए किसान को क्षतिपूर्ति दी जानी चाहिये। भारत की गरीबी दूर करने के लिए उन्होने कहा कि यदि इस देष से भ्रश्टाचार दूर हो जाये और काला धन भारत वापस आ जाये तो देष मे कोई गरीब नही रहेगा। दुर्भाग्य तो यह है कि जिन लोगों के हाथ मे सत्ता है वही लुटेरे है। उन्होने कहा कि यदि एक गांव से एक सो किसान, एक सो जवान तथा एक सो माता बहने भ्रश्टाचार के खिलाफ खडे हो जाये तो देष का नक्सा ही बदल जाए। उन्होने गांव मिरगपुर की प्रषन्सा की, कि वहां लोग सात्विक है। उन्होने सभी से षराब न पीने की अपील की। गुरू राम देव ने किसानों से कहा कि वह देषी खाद का प्रयोग करने को गाय पाले। उन्होने बताया कि गाय को गोबर 15 किलो, 10 किलो गो मूत्र, एक मुठ्ठी गुड व एक मुठ्ठी दाल को ड्रम मे डाल कर सडाले यह खाद एक एकड भूमि के लिए काफी है। गुरू रामदेव ने अन्त मे योग तथा अनेक बीमारियों के उपचार के बारे मे बताया।
     इनके अलावा भारतीय किसान यूनियन के राकेष टिकैत, किसान पंचायत के संयोजक भगत सिंह वर्मा ने भी सम्बोधित करते हुए किसानों की दुरदर्षा का बखान किया। इस अवसर पर अनूप सिंह चैयरमेन, डा.डी.के.जैन, चन्द्रपाल सिंह, राजेन्द्र त्यागी, डा. कल्याण सिंह सहित बडी संख्या मे किसान नेता मौजूद रहे।
बाबा रामदेव जी महाराज की किसान पंचायत को देखते हुए प्रषासन ने सुरक्षा को कडी व्यवस्था की थी। इस अवसर पर सुरक्षा की दृश्टी से उपजिलाधिकारी राजेष कुमार सिंह, पुलिस क्षेत्राधिकारी सुरेषपाल सिंह कई थानो की पुलिस के साथ मौजूद रहे।

Thursday, October 18, 2012

...1962 में आखिर क्‍यों भारत पर चढ़ गया था चीन

...1962 में आखिर क्‍यों भारत पर चढ़ गया था चीन
ग्लोबल टाइम्स में छपे एक हालिया लेख में चाइनीज एकेडमी ऑफ सोशल साइंसेज के एक शोधकर्ता ने लिखा है, 'माओ एक जोरदार प्रहार के जरिए नेहरू को महाशक्तियों के प्रभाव के प्रति सचेत करना चाहते थे, ताकि वह होश में आएं और युद्ध खत्म करें। युद्ध सभ्यताओं के बीच के संवाद का सबसे अतिवादी तरीका है।' इस एक उक्ति से युद्ध के बारे में चीनी रुख को समझा जा सकता है : 1962 का संघर्ष पहले किया गया दंडात्मक प्रहार था, जिसका उद्देश्य माओ के शब्दों में भारत से 'कम से कम तीस साल की शांति की गारंटी' था। 
1962 भारत के राष्ट्रीय मानस में बसा है। कई दशकों तक यह असंभव था कि बिना आवेश के युद्ध और इस विवाद के पीछे के गहरे मुद्दों की पड़ताल की जा सके। भारत के लिए 1962 एक स्पष्ट राजनीतिक और सैन्य असफलता थी। नेविल मैक्सवेल का आकलन (जो भले ही पूर्वाग्रह-ग्रस्त है) अक्टूबर युद्ध के बारे में सबसे सटीक जानकारी देता है क्योंकि यह युद्ध में सेना के प्रदर्शन के आकलन के लिए बनी गोपनीय सरकारी हेंडरसन- ब्रूक्स रिपोर्ट पर आधारित है
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केजरीवाल का खुल गया 'राज', इनके सहारे फोड़ते हैं 'खुलासा बम'


PICS: केजरीवाल का खुल गया 'राज', इनके सहारे फोड़ते हैं 'खुलासा बम'

अनिरुद्ध शर्मा  |  Oct 18, 2012, 11:15AM IST
 
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PICS: केजरीवाल का खुल गया 'राज', इनके सहारे फोड़ते हैं 'खुलासा बम'
नई दिल्ली. रॉबर्ट वाड्रा-डीएलएफ प्रकरण और सलमान खुर्शीद के एनजीओ पर हुए खुलासे के बाद अरविंद केजरीवाल की संस्था इंडिया अंगेस्ट करप्शन (आईएसी) के दफ्तर में देशभर से नेताओं व ब्यूरोक्रेट्स के घोटालों से जुड़े दस्तावेजों के आने का सिलसिला तेज हो गया है। थोक के भाव में आ रहे इन दस्तावेजों की पड़ताल व चयन के लिए केजरीवाल ने बाकायदा रिसर्च एंड एनालिसिस विंग का गठन किया है।
इस टीम में उच्चकोटि के छह पेशेवर स्वयंसेवी हैं। इनमें चार्टर्ड अकाउंटेंट, आईआईएम के गेस्ट लेक्चरर, आईआईटीयन, एडवोकेट, जर्नलिस्ट और एक मैनेजमेंट ग्रेजुएट शामिल है। सुरक्षा कारणों से इन के नाम उजागर नहीं किए गए हैं, लेकिन सभी दिल्ली में ही रहते हैं।
 रिसर्च टीम इस समय करीब एक दर्जन मुद्दों पर काम कर रही है। इनका आने वाले दिनों में खुलासा हो सकता है
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खुर्शीद की केजरीवाल को 'गंभीर धमकी'

खुर्शीद की केजरीवाल को \'गंभीर धमकी\'
नई दिल्ली. कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने उन पर आरोप लगाने वाले अरविंद केजरीवाल को धमकी दी है। कहा कि उन्हें वकीलों का मंत्री बनाया गया था। कहा गया था कि वे कलम से काम करें। लेकिन अब वे खून से भी काम करेंगे। जवाब में केजरीवाल ने कहा है कि 'खुर्शीद मुझे जान से मारने की धमकी दे रहे हैं। मेरी जिंदगी भगवान के हाथों में है। वे एक को मारेंगे तो सौ केजरीवाल पैदा होंगे।' 
खुर्शीद मंगलवार रात दिल्ली में अपने सरकारी निवास पर कार्यकर्ताओं की सभा में बोल रहे थे। उनके भाषण का वीडियो फुटेज बुधवार को मीडिया में आया। इसमें खुर्शीद केजरीवाल को अपने संसदीय क्षेत्र फर्रुखाबाद जाने के बयान पर चुनौती देते हुए दिख रहे हैं। कह रहे हैं, 'वे (अरविंद) फर्रुखाबाद जाएं लेकिन वहां से लौटकर भी दिखाएं। केजरीवाल कहते हैं कि वह सवाल पूछ रहे हैं और हम जवाब दें। मैं कहता हूं कि तुम जवाब सुनो और सवाल पूछना भूल जाओगे।' 
सलमान खुर्शीद के डॉ. जाकिर हुसैन मेमोरियल ट्रस्ट पर विकलांगों के नाम पर लाखों रुपए के गबन का आरोप है। एक निजी टीवी चैनल ने 10 अक्टूबर को स्टिंग ऑपरेशन कर इसका भंडाफोड़ किया था। उत्तर प्रदेश के 17 जिलों में गड़बड़ी का आरोप लगाया गया है। खुर्शीद की पत्नी लुईस खुर्शीद ट्रस्ट की प्रोजेक्ट डायरेक्टर हैं। इसके बाद आईएसी के बैनर तले केजरीवाल और उनके साथियों ने खुर्शीद के खिलाफ प्रदर्शन कर उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की। 
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उठे सवाल, शरद पवार पर क्यों चुप रहे केजरीवाल?

उठे सवाल, शरद पवार पर क्यों चुप रहे केजरीवाल?
नई दिल्ली. पूर्व आईपीएस अधिकारी और वकील वाई.पी. सिंह ने सामाजिक कार्यकर्ता अरविंद केजरीवाल पर शरद पवार का नाम न लेने का आरोप लगाते हुए भविष्य में उन्हें कानूनी मदद देने से इनकार कर दिया है। वाईपी सिंह ने लवासा सिटी के सिलसिले केंद्रीय कृषि मंत्री शरद पवार पर आरोप लगाया है। वाईपी सिंह ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश का उल्लंघन करते हुए महाराष्ट्र सरकार में मंत्री रहे अजित पवार ने बिना सार्वजनिक नीलामी के लवासा की 348 एकड़ जमीन लेक सिटी कॉरपोरेशन (लेक सिटी कॉरपोरेशन को बाद में लवासा ने खरीद लिया था) को 23 हजार रुपये प्रति महीने के किराए पर 30 साल के लिए लीज पर दे दी। पूर्व पुलिस अधिकारी ने कहा कि मुंबई में छोटे से छोटा फ्लैट भी किराए पर इतने रुपये में नहीं मिलता है। वाईपी सिंह का कहना है कि इस मामले के कागज़ात अरविंद केजरीवाल के पास थे, लेकिन उन्होंने इन्हें सार्वजनिक नहीं किए। वाईपी सिंह ने शरद पवार की बेटी सुप्रिया सुले, दामाद सदानंद सुले और भतीजे अजित पवार पर मनी लॉन्ड्रिंग और भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए।
वाईपी सिंह ने सुप्रिया सुले पर यह आरोप लगाया कि उन्होंने संसद सदस्य बनने के लिए अपनी संपत्ति की गलत जानकारी दी। सिंह ने दावा किया, 'लेक सिटी कॉरपोरेशन में 20.81 फीसदी शेयर सुप्रिया सुले और सदानंद सुले के नाम थे। इसमें कम से कम 10.4 फीसदी शेयर सुप्रिया के पास थे। जून, 2008 में एक्सिस बैंक ने लवासा प्रोजेक्ट की कीमत 10 हजार करोड़ आंकी थी। जब सुप्रिया ने अपने शेयर बेचे तो प्रोजेक्ट की कीमत 5 हजार करोड़ रही होगी। लेकिन सुप्रिया ने 15 करोड़ की संपत्ति घोषित की। इसके मुताबिक सुप्रिया ने लवासा में अपने प्रोजेक्ट सिर्फ 5 करोड़ में बेचे। लेकिन एक्सिस बैंक के मूल्यांकन को आधार माना जाए तो सुप्रिया ने कम से कम 500 करोड़ रुपये में बेचे गए होंगे। इसकी जांच होनी चाहिए।'

वाईपी सिंह ने शरद पवार पर आरोप लगाया कि कृषि मंत्री के पद पर रहते हुए लवासा प्रोजेक्ट को मदद पहुंचाई। वाईपी सिंह ने दावा किया, '2006 में लवासा ने कुछ मुद्दों पर छूट की मांग की थी। इसमें फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) जिसमें झील, पहाड़ जैसे कारकों के मद्देनजर बिल्डिंग की ऊंचाई बढ़ाए जाने की इजाजत मांगी गई थी। शरद पवार ने अपने भतीजे और तत्कालीन सिंचाई मंत्री अजित पवार ने तत्कालीन मुख्यमंत्री, वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के साथ लवासा के गेस्ट हाउस एकांत में बैठक की थी। इस बैठक में यह निर्णय लिया गया कि लवासा को ग्लोबल फ्लोटिंग एफएसआई देने का फैसला किया। हमारे पास उस बैठक का सारा ब्योरा है।' वाईपी सिंह ने नाराणय राणे पर यह आरोप लगाया कि लवासा परियोजना पर आईएएस अधिकारी रमेश कुमार ने आपत्ति जताई थी, लेकिन उनकी चिट्ठी को राणे ने दबा दिया।
 
वाईपी सिंह ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल को शरद पवार के बारे में काफी जानकारी थी। वाईपी सिंह ने कहा, 'मेधा पाटकर के नेतृत्व में एक समिति बनी थी, जिसके सामने महाराष्ट्र के कई मामले थे। उस समिति में मैं और अरविंद दोनों सदस्य थे। इस समिति के सामने भी शरद पवार का भ्रष्टाचार का मामला था। मुझे उम्मीद थी कि अरविंद केजरीवाल बुधवार को यही खुलासा करेंगे, लेकिन उन्होंने इसे छोड़कर बहुत हल्का मामला उठाया।' वाईपी सिंह ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि शरद पवार के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए और उन्हें अपना पद छोड़ देना चाहिए। वाईपी सिंह ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल को लगा होगा कि दिल्ली में कांग्रेस के बाद बीजेपी पर हमला कर राजनीतिक जगह बनाई जा सकती है। शायद इसलिए शरद पवार को छोड़कर नितिन गडकरी पर हमला किया गया।
वाईपी सिंह ने अन्ना हजारे पर भी निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें भी लवासा मामले की जानकारी थी। लेकिन उन्होंने इस मुद्दे को दिल्ली में धरने प्रदर्शन के दौरान नहीं उठाया। वाईपी सिंह ने दावा किया कि अन्ना हजारे शरद पवार के लिए 'सॉफ्ट कॉर्नर' रखते हैं। 

शरद पवार ने वाईपी सिंह के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने अपने बचाव में दावा किया, 'लवासा की 80 फीसदी जमीन पानी में डूबी हुई थी।' पवार ने कहा, 'मैं मुख्यमंत्री के साथ एकांत गेस्ट हाउस में हुई बैठक में मौजूद थे। इस बारे में ज्यादा इसलिए नहीं बोलना चाहता हूं क्योंकि यह मामला कोर्ट के विचाराधीन है।' पवार ने लवासा की तारीफ करते हुए कहा कि यह अच्छा हिल स्टेशन है, जहां नामी लोग भी रहते हैं।

अरविंद केजरीवाल पर लगे आरोपों पर सफाई देते हुए उनके सहयोगी मनीष सिसौदिया ने कहा कि हम लोग लगातार शरद पवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के मुद्दे उठाते रहे हैं। सिसौदिया के मुताबिक, 'इस साल जब हम लोग जुलाई में केंद्रीय मंत्रियों के इस्तीफे की मांग कर रहे थे, तब उसमें शरद पवार का भी नाम था। तब हम लोगों ने गेहूं आयात घोटाला और लवासा घोटाले का आरोप लगाया था।' सिसौदिया ने कहा कि यह अच्छा हो रहा है कि देश में लोग अब काग़ज़ों के साथ भ्रष्टाचार की शिकायत को लेकर सामने आ रहे हैं। सिसौदिया ने कहा यह मुद्दा वाईपी सिंह बनाम अरविंद केजरीवाल नहीं है। बल्कि यह मुद्दा देश के सरकारी संसाधनों और बनाम उसे लूटने वालों का है।

 कांग्रेस के प्रवक्ता राशिद अल्वी ने वाईपी सिंह के आरोपों पर कहा कि इस मामले कि उन्हें जानकारी नहीं है, इसलिए वे इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर सकते हैं।
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वाराणसी रेंज के IG ने कहा- 'भीख मांगती है यूपी पुलिस'

PIX: वाराणसी रेंज के IG ने कहा- \'भीख मांगती है यूपी पुलिस\'
वाराणसी. उत्तर प्रदेश पुलिस लोगों से भीख मांगती है, बुजुर्गों को सड़क पार नहीं कराती, विदेशी और दक्षिण भारतीय सैलानियों से वसूली करती है। यदि कोई नागरिक यह बात कहे तो समझा जाएगा कि यूपी पुलिस पर अपनी भड़ास निकाल रहा है। लेकिन अब उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने यह बात कही है। वाराणसी रेंज केआईजी गोपाल लाल मीणा ने बुधवार को यह सब बातें कहीं। 
 पुलिसवालों को सलाह देते हुए मीणा ने कहा, 'हमारे पुलिस वाले लोगों से पांच-दस रुपये की भीख मांगते हुए दिखते हैं। यह देखकर पुलिस का मनोबल टूटता है। कोई सीनियर सिटीजन आता है तो हम उसे सम्मान नहीं देते जबकि हमें उसे सम्मान देना चाहिए। घाट के पास पुलिसवाले अकसर विदेशी सैलानियों की गाड़ियों से पैसे लेते दिख जाते हैं। यह सब गलत है। हमें यूपी पुलिस की छवि का ख्याल रखना चाहिए।'
 मीणा ने कहा, 'मेरे बयान को किस रूप में लिया जा रहा है ये मैं नहीं जानता लेकिन मैं यह जानता हूं कि मेरी जिम्मेदारी वाराणसी को जिम्मेदार पुलिस देने की है और वो मैं देकर रहूंगा।'
मीणा कहते हैं, 'पुलिसवालों जो सड़क पर करते हैं उससे पूरी वर्दी दागदार होती है। हम चाहते हैं कि हमारे पुलिसवालों का चरित्र मजबूत हो ताकि आसानी से उनकी बोली न लगाई जा सके। मैं अपनी रेंज में पुलिस की छवि सुधारने के लिए काम कर रहा हूं और करता रहूंगा।'
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चिट्ठी,,,,,,,,,,, गाँव सॆ मॆरॆ जब पहलॆ, आती थी चिट्ठी ॥

गाँव सॆ मॆरॆ जब पहलॆ, आती थी चिट्ठी ॥
वह स्वप्न-परी बन, मुस्काती थी चिट्ठी ॥

शब्दॊं सॆ उसकॆ स्नॆह,की वर्षा हॊती थी,
बॆटॆ की तन्हाई मॆं, माँ कितना रॊती थी,
पंक्ति-पंक्ति मॆं प्यार, पिता का बहता था,
कब आयॆंगॆ भैया, छॊटा भाई कहता था,

उन सबका चॆहरा भी,दिखलाती थी चिट्ठी ॥
आशिष की अमृत-धार, बहाती थी चिट्ठी ॥१॥
गाँव सॆ मॆरॆ जब पहलॆ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

बहना की तीखी कुछ,तंज भरी सी बातॆं,
लड़ना-भिड़ना चिड़ना, की सारी सौगातॆं,
भैया यॆ लाना,वॊ लाना,की सब फ़रियादॆं,
ख़त मॆं दिख जाती थीं, नई पुरानी यादॆं,

सावन मॆं राखी भर भर, लाती थी चिट्ठी ॥
अम्मा बाबूजी जैसा, बतियाती थी चिट्ठी ॥२॥
गाँव सॆ मॆरॆ जब पहलॆ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
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भॆंट भलाई और कुशल, मंगल की पाती, 
पल-भर मॆं वह लाखॊं, खुशियां दॆ जाती,
याद दिला जाती थी,सारॆ दिन मस्ती कॆ,
और दिखाती थी चौबारॆ,अपनी बस्ती कॆ,

पढकर मन कॊ कितना,हरषाती थी चिट्ठी ॥
सच कहता हूं, दर्पण बन, जाती थी चिट्ठी ॥३॥
गाँव सॆ मॆरॆ जब पहलॆ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

ममता और आशिष की, मूरत हॊती थी,
चिट्ठी आना शुभ-घड़ी, मुहूरत हॊती थी,
एक कागज़ पर कितनॊं, की सूरत हॊती,
तार किया जाता जब,बहुत ज़रूरत हॊती,

अनहॊनी सॆ हमकॊ, बहुत रुलाती थी चिट्ठी ॥
फ़िर खुद इस दिल कॊ, सहलाती थी चिट्ठी ॥४॥
गाँव सॆ मॆरॆ जब पहलॆ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

एक ख़त मॆं जानॆ,कितनॆ संदॆश भरॆ हॊतॆ,
अम्मा बाबूजी कॆ, लाखॊं निर्दॆश भरॆ हॊतॆ,
कठिन ज़मानॆ की, तस्वीर रखा करतॆ थॆ,
शॆष कुशल-मंगल सॆ,अंत लिखा करतॆ थॆ,

बिल्कुल अम्मा बाबूजी,बन जाती थी चिट्ठी ॥
सब निश्छल रिश्तॆ यही, निभाती थी चिट्ठी ॥५॥
गाँव सॆ मॆरॆ जब पहलॆ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,

टुकुर टुकुर आँखॆं तकतीं,ख़त आनॆ की राहॆं,
और डाकियॆ कॆ थैलॆ पर,रहती रॊज निगाहॆं,
अब लायॆगी,कब लायॆगी, नया संदॆशा पाती,
हर धड़कन सीनॆ मॆं बस,बात यही दॊहराती,

इन्तज़ार की परिभाषा, सिखलाती थी चिट्ठी ॥
जीवन कॆ कैसॆ कैसॆ, रंग दिखाती थी चिट्ठी ॥६॥
गाँव सॆ मॆरॆ जब पहलॆ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,




कवि-"राज बुन्दॆली"